गुरु अर्जन देव जयंती

सिख समुदाय के पांचवें सत-गुरु अर्जन देव जी का जन्म 19 बैसाख संवत 1620 (15 अप्रैल 1563) को गोइंदवाल में गुरु राम दास और माता भानी के घर हुआ। गुरु अर्जन देव के जन्म उत्सव को ‘अर्जन जयंती’ के रूप में मनाया जाता है।

गुरु अर्जन देव जयंती  (Guru Angad Dev Jayanti  in Hindi)


 गुरु अर्जन देव जयंती 16 जून को मनाई जाएगी। इस शुभ अवसर पर गुरुद्वारों में भव्य कार्यक्रम सहित गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है। अंत: सामूहिक भोज (लंगर) का आयोजन किया जाता है। अमृतसर, तरनतारन, भैणी, सरहाली, खडूर साहिब, गोइंदवाल, करतारपुर समेत अनेक सिख धार्मिक स्थलों पर यह त्यौहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है।

गुरु अर्जन देव का जीवन परिचय (Guru Arjan Dev’s Life History in Hindi)

गुरु अर्जन देव जी ने भाद्रपद शुदि एकम (आश्विन 20) संवत 1638 (सितम्बर 1581) को धर्म-गुरु की उपाधि प्राप्त की। धर्मगुरु संस्कार गुरु राम दास साहिब जी ने ‘शब्द हज़ारे’ की प्रसिद्धि पर प्रसन्नता पूर्वक किया। गुरु अर्जन देव शांत व प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी थे, जिन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन किया। सम्पादन के समय धूर्त लोगों ने अफवाह फैलाई कि ग्रंथ में इस्लाम के खिलाफ लिखा गया है, लेकिन जब अकबर को ग्रंथ की पवित्रता का पता चला तो उन्होंने खेद प्रकट करते हुए गुरु अर्जन देव जी को 51 मोहरें भेट में दीं।

गुरु अर्जन देव का उपदेश (Teachings of Guru Arjan Dev Ji in Hindi)


* सुबह जल्दी उठ कर स्नान करके वाहिगुरु मंत्र का स्मरण करना और बाणी पढ़ना।
* दोनों हाथों की कमाई का निर्वाह करना तथा जरूरतमंदों को दान देना।
* अहंकार का त्याग करना।



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