Ravivar Vrat Vidhi in Hindi | Download PDF । रविवार व्रत विधि और पूजा विधि 

रविवार व्रत विधि

सूर्य देवता समस्त ब्राह्मण को उर्जा देने वाले देवता है। रविवार का व्रत सूर्य देवता को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। सूर्य देवता सौर मंडल के केंद्र में स्थित है।

रविवार व्रत विधि (Ravivar Vrat Vidhi)


रविवार का व्रत आश्विन मॉस के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को रखना चाहिए। परिवार के सदस्यों को सुबह जल्दी उठ कर स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पण करना चाहिए। इसके बाद सूर्य देवता की प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए। इसके लिए धुप अगरबत्ती चन्दन की लकड़ी फूल और विशेष प्रकार के व्यंजनों का प्रयोग करना चाहिए। व्रत अआरम्भ करने से पहले रविवार व्रत की कथा परिवार के सभी सदस्यों को सुनानी चाहिए। इसके बाद व्रत का आरम्भ करना चाहिए।

रविवार व्रत के नियम

व्रत के दौरान तेल नमक निम्बू के रस वाला भोजन नहीं खाना चाहिए। रविवार का व्रत पूरे दिन चलता है और उसे अगले दिन सूर्य को जल अर्पण करके ही खोला जाता है।​

रविवार व्रत की कथा


एक समय की बात है की एक धार्मिक और पवित्र महिला थी। वह अपने घर को बहुत साफ़ रखती थी। यही नहीं वह अपने घर के फरश पर गाय के गोबर का लैप लगाती थी पारंपरिक घरों में सदियों पुरानी परंपरा है। इसके लिए वह अपने पड़ोस के घर से गाय का गोबर लाती थी। ​यह सब काम करने के बाद ही वह महिला भगवान की पूजा करती थी और खाना खाती थी। एक दिन उस महिला के पडोसी ने इर्ष्य की वजह से गाय को अपने घर के अन्दर बाँध दिया ताकि वह महिला गोबर ना ले सके। गोबर ना मिलने के कारण उस महिला ने सारा दिन कुछ नहीं खाया और रात में भूके पेट ही सो गयी। क्यूंकि उस दिन रविवार था और उस महिला ने सारा दिन व्रत रखा था तो सूर्य देवता उससे प्रसन्न हो गए।​

सूर्य देवता उस महिला के सपने में आये और उससे कहा की वह उसे गाय उपहार के तौर पर देंगे ताकि उस महिला को अपने घर को साफ़ रखने में कोई समस्या नहीं आये। अगले दिन सुबह उस महिला ने देखा की उसके घर में एक सुन्दर सी गाय और बछड़ा है। वह गाय सोने का गोबर देने लगी और यह देख कर उस महिला के पडोसी को इर्ष्य हुई। पडोसी ने राजा को उस दिव्य गाय और बछड़े के बारे में बताया। राजा के उस महिला से उस गाय और बछड़े को छीन लिया। जिस दिन राजा के गाय और बछड़े को छिना वह रविवार का दिन था। फिर से महिला रविवार वाले दिन भूकी रही और उसका व्रत हो गया। उस रात सूर्य देवता राजा के सपने में आये और उसे बताया की उसने महिला की गाय और बछड़े को छीन कर बहुत बड़ा पाप किया है।

सूर्य देवता के क्रोध से भय्वीत हो कर राजा नींद से जाग गया और उसने देखा की गाय ने सोने का गोबर नहीं दिया बल्कि बहुत ही दुर्घंध वाला गोबर पुरे महल में कर दिया है। राजा ने तुरंत उस गाय और बछड़े को उस महिला को सौंप दिया और उसके पडोसी को दंड दिया। इसके बाद वह धार्मिक महिला ख़ुशी से रही और राजा ने भी राज्य के लोगों को सूर्य देवता का रविवार व्रत रखने का सुझाव दिया।

रविवार व्रत के फायदे

नारद पुराण में यह लिखा है की रविवार को व्रत रखने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है और एक खुशहाल और स्वास्थ्य जीवन व्यतीत कर सकता है। इस व्रत से बहुत सारी बिमारियों से मुक्ति मिल सकती है और दीमाग भी तेज होता है।​

हिन्दू व्रत विधियां 2018


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