चैत्र नवरात्रि और ख़ास उपाय

नमाज़ का समय

पूर्णिमा

हिन्दू मान्यतानुसार पूर्णिमा तिथि चंद्रमा को सबसे प्रिय होती है। पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ करना और दान देना बेहद शुभ माना जाता है। वैशाख, कार्तिक और माघ की पूर्णिमा को तीर्थ स्नान और दान-पुण्य दोनों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

 

पूर्णिमा व्रत विधि (Purnima Vrat Vidhi in Hindi)

भविष्यपुराण के अनुसार पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थान पर स्नान करना चाहिए। अगर ऐसा संभव ना हो तो शुद्ध जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पितरोंक का तर्पण करना शुभ माना जाता है।

पूर्णिमा तिथि प्रात: व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद पूरे विधि-विधान से चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए। चंद्रमा की पूजा करते समय व्यक्ति को इस विशेष मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:

वसंतबान्धव विभो शीतांशो स्वस्ति न: कुरु।
गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते।

इसके बाद रात्रि में मौन होकर खाना खाना चाहिए। प्रत्येक मास की पूर्णिमा को इसी प्रकार चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए। इससे व्यक्ति को सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

पौष पूर्णिमा 

पौष पूर्णिमा माघ महीने के पूर्णिमा वाले दिन आती है। पौष पूर्णिमा का शुभ दिन भक्तों के बीच बहुत महत्व रखता है। पौष पूर्णिमा की शुरुआत से शुरू होने पर भक्त गंगा या यमुना नदी पवित्र डुबकी लेते हैं। इस साल पौष पूर्णिमा 2 जनवरी 2018 को मनाई जाएगी।


भक्तों का मानना ​​है कि इस दिन पवित्र नदी गंगा या यमुना में एक पवित्र डुबकी लगाने से आत्मा को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल सकती है और व्यक्ति इस जन्म और पूर्व जन्मों में किए गए सभी बुरे कामों से छुटकारा पा सकता है।

पवित्र डुबकी लेने के बाद भक्त पूरी श्रधा के साथ सूर्य को जल अर्पण करते है और शिवलिंग पर पानी चढाते है। मंदिरों में पवित्र मंत्रों के साथ कई अन्य धार्मिक प्रथाओं का पालन किया जाता है। इस समय के दौरान भागवत गीता और रामायण का व्याख्यान भी आयोजित किया जाता हैं। इस अवसर पर ‘अन्न दान' के रूप में कई आश्रमों और मंदिरों में पूरे दिन जरूरतमंद लोगों को मुफ्त भोजन दिया जाता है। हिंदू विश्वास के अनुसार पौष पूर्णिमा पर किए गए दान से भविष्य में अच्छे परिणाम मिलते हैं और भक्तों की सभी इच्छाओं भी पूरी होती है। ​

हिन्दू व्रत विधियां 2018


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