Mata Skandmata | Facts and Mantra in Hindi | 5th Form of Navdurga | माता स्कंदमाता 

पंचम नवदुर्गा: माता स्कंदमाता

पंचम नवदुर्गा: माता स्कंदमाता

माता दुर्गा का स्वरूप "स्कन्दमाता " के रूप मे नवरात्रि के पाँचवे दिन पूजा की जाती है | शैलपुत्री ने ब्रह्मचारिणी बनकर तपस्या करने के बाद भगवान शिव से विवाह किया | तदंतर स्कन्द उनके पुत्र रूप मे उत्पन्न हुए | ये भगवान स्कन्द कुमार कार्तिकेयन के नाम से भी जाने जाते है | छान्दोग्य श्रुति के अनुसार माता होने से वे "स्कन्दमाता" कहलाती है | वर्ष 2018 में मां स्कंदमाता की पूजा 22 मार्च (चैत्र नवरात्र) और 13 अक्टूबर (शारदीय नवरात्र) को की जाएगी। 


माता स्कंदमाता का उपासना मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

 

माता का स्वरूप


स्कन्दमाता की दाहिनी भुजा मे कमलपुष्प, बाई भुजा वार मुद्रा मे है | इनकी तीन आँखे ओर चार भुजाए है | वर्णपूर्णत: शुभ कमलासन पर विराजित ओर सिंह इनका वाहन है | इसी कारण इन्हे पद्मासनदेवी भी कहा जाता है | पुत्र स्कन्दइन की गोद मे बैठे है |

आराधना महत्व

स्कन्दमाता की उपासना से भक्त की समस्त मनोकामनाएपूर्ण, इस मृत्यु लोक मे ही उसे परम शांति ओर सुख का अनुभव होने लगता है, मोक्ष मिलता है | सूर्यमंडल की देवी होने के कारण इन का उपासक आलोकिक तेज एवं कांति से संपन्न हो जाता है | साधक को अभिस्ट वस्तु की प्राप्ति होती है ओर उसे पुल ना रहित महान ऐश्वर्य मिलता है |

 

पूजा मे उपयोगी वस्तु

पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। 

स्कन्दमाता की आरती

जय तेरी हो अस्कंधमाता 
पांचवा नाम तुम्हारा आता 
सबके मन की जाननहारी 
जगजननी सबकी महतारी 
तेरी ज्योत जलाता रहू मै 
हरदम तुम्हे ध्याता रहू मै 
कई नामो से तुझे पुकारा 
मुझे एक है तेरा सहारा 
कही पहाड़ो पर है डेरा 
कई शेहरो मै तेरा बसेरा 
हर मंदिर मै तेरे नजारे 
गुण गाये तेरे भगत प्यारे 
भगति अपनी मुझे दिला दो 
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो 
इन्दर आदी देवता मिल सारे 
करे पुकार तुम्हारे द्वारे 
दुष्टदत्यज बचढ़कर आये 
तुम ही खंडा हाथ उठाये 
दासो को सदा बचाने आई 
'भक्त' की आस पुजाने आई


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