सिंहस्थ कुंभ

भारत के सबसे महत्वपूर्ण और धार्मिक कार्यक्रमों में एक है कुंभ। साल 2028 में इस पर्व की शुरुआत 21 मई से होगी। उज्जैन (Ujjain) में मनाए जाने वाले यह कुंभ पर्व "सिहंस्थ कुंभ" के नाम से जाना जाता है। 
उज्जैन को कालगणना का केन्द्र भी माना जाता है। पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर बसे इस महान प्रदेश का संबंध भगवान शिव से है। यहां भगवान शिव महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं।

उज्जैन सिहंस्थ कुंभ (Ujjain Simhasth Kumbh)
सिंहस्थ कुंभ तब मनाया जाता है जब बृहस्पति सिंह राशि में हो और सूर्य मेष राशि में स्थित हो। इस साल सिहंस्थ कुंभ मेला चैत्र मास की पूर्णिमा यानि 21 मई  से शुरु होगा। 


कब-कब मनाया जाता है कुंभ (About Kumbh in Hindi)
स्कंद पुराण के अनुसार कुंभ और मेष राशि में सूर्य होने पर हरिद्वार में, मेष राशि में गुरु और मकर राशि में सूर्य होने पर प्रयाग, बृहस्पति और सूर्य सिंह राशि में हों तो नासिक में तथा सिंह राशि में गुरु और मेष राशि में सूर्य होने पर उज्जैन में कुंभ पर्व होता है। एक स्थान पर कुंभ का पर्व 12 साल में एक बार मनाया जाता है। 

कुंभ मेला क्यों मनाया जाता है (Story of Kumbh Mela)
कुंभ महापर्व को लेकर एक पौराणिक कथा बेहद प्रचलित है। कथा के अनुसार समुद्रमंथन के समय सागर से अमृत से भरा एक घड़ा प्राप्त हुआ। देवता और दानवों में इसे पाने को लेकर होड़ मच गई। अगर यह अमृत दानवों के पास चला जाता तो यह मानव संस्कृति के लिए खतरनाक होता। ऐसे में देवराज इन्द्र ने अपने पुत्र जयंत को अमृत का घड़ा देकर भागने के लिए कहा। जब जयंत अमृत का घड़ा लेकर दौड़ रहे थे तब घड़े से कुछ बूंदे गिरकर हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में गिर गईं। 
अमृत का घड़ा पाने के लिए देवताओं और दानवों में 12 दिन तक युद्ध हुआ जो धरती पर बारह वर्ष के बराबर है।

कुंभ के दौरान क्या करें (Kumbh Puja Vidhi)
कुंभ पर्व के दौरान तिल, लोहा, कपास, सोना, नमक, सप्त धान्य, भूमि या गाय आदि का दान करना चाहिए। साथ ही स्नान के बाद कुंभ पर्व के समय सूर्य देवता को अर्घ्य देना चाहिए। 

सिंहस्थ कुम्भ स्नान  (Ujjain Kumbh Snan)
मान्यतानुसार कुंभ पर्व के समय पवित्र नदी में स्नान (Snan) करना चाहिए। कुंभ पर्व में स्नान का महत्व (Holy bath in Kumbh) पूर्णिमा और अमावस्या पर्व के स्नान से भी अधिक माना गया है।



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