जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा

प्रतिवर्ष उड़ीसा के पूर्वी तट पर स्थित श्री जगन्नाथ पुरी में भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ-यात्रा का उत्सव पारंपरिक रीति के अनुसार बड़े धूमधाम से आयोजित किया जाता है। जगन्नाथ रथ उत्सव आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया से आरंभ करके शुक्ल एकादशी तक मनाया जाता है। इस दौरान रथ को अपने हाथों से खिंचना बेहद शुभ माना जाता है। 


रथ यात्रा (Rath Yatra)


वर्ष 2018 में जगन्नाथ रथयात्रा  का पर्व आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रथमा को शुरु होगा यानि 14 जुलाई से आरंभ होगी। 


रथ का रूप (Form Of Chariot)

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा में भगवान श्री कृष्ण जिन्हें जगन्नाथ भी कहते हैं, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा का रथ बनाया जाता है।  यह रथ लकड़ी के बने होते हैं। इन रथों के नाम हैं: 
* जगन्नाथजी के रथ को 'गरुड़ध्वज' या 'कपिलध्वज' 
* बलराम जी के रथ को  'तलध्वज' 
* सुभद्रा जी का रथ "देवदलन" व "पद्मध्वज' 
 
 

रथयात्रा का पूर्ण विवरण (Details of Rath Yatra in Hindi)


रथ यात्रा महोत्सव में पहले दिन भगवान जगन्नाथ, बलराम और बहन सुभद्रा का रथ आषाढ़ शुक्ल द्वितीया की शाम तक जगन्नाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थिति गुंडीचा मंदिर तक खिंच कर लाया जाता है। इसके बाद दूसरे दिन रथ पर रखी जगन्नाथ जी, बलराम जी और सुभद्रा जी की मूर्तियों को विधि पूर्वक उतार कर इस मंदिर में लाया जाता है और अगले 7 दिनों तक श्रीजगन्नाथ जी यहीं निवास करते हैं। 

इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी के दिन वापसी की यात्रा की जाती है जिसे बाहुड़ा यात्रा कहते हैं। इस दौरान पुन: गुंडिचा मंदिर से भगवान के रथ को खिंच कर जगन्नाथ मंदिर तक लाया जाता है। मंदिर तक लाने के बाद प्रतिमाओं को पुन: गर्भ गृह में स्थापित कर दिया जाता है। 


रथयात्रा का इतिहास (History of Rath Yatra in Hindi)

पौराणिक मान्यता है कि द्वारका में एक बार श्री सुभद्रा जी ने नगर देखना चाहा, तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर का भ्रमण कराया। इसी घटना की याद में हर साल तीनों देवों को रथ पर बैठाकर नगर के दर्शन कराए जाते हैं। रथयात्रा से जुड़ी कई अन्य रोचक कथाएं भी हैं जिनमें से एक जगन्नाथ जी, बलराम जी और सुभद्रा जी की अपूर्ण मूर्तियों से भी संबंधित हैं। 
 
 

जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद:

उड़ीसा की सांस्कृतिक झलक को देखना हो तो भगवान जगन्नाथ की यात्रा से बेहतर कोई समय नहीं हो सकता। जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के दौरान उड़ीसा की हवाओं में प्रभु जगन्नाथ की आस्था का रंग घुला हुआ होता है। जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का एक आकर्षण यहां मिलने वाला महाप्रसाद भी हैं। महाप्रसाद दो तरह का होता हैं एक सूखा और दूसरा गीला। सूखे प्रसाद में मीठाई आदि आते हैं तो दूसरे में मिक्स चावल, सब्जी, सागा भाज़ा (पालक फ्राई) और मालपुआ आदि। तो चलिए आज बनाना सीखते हैं मालपुए और सागा भाजा।

सागा भाजा बनाने की रेसिपी

सागा भाजा पालक फ्राई को कहा जाता है। आइए जानें आसानी से पालक फ्राई बनाने की विधि।

आवश्यक सामग्री -

1.     पालक- 500 ग्राम

2.     टमाटर- 2

3.     तेल- 2 टेबल स्पून

4.     हरा धनिया- 2 टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ)

5.     हरी मिर्च- 2 (बारीक कटी हुई)

6.     अदरक- 1 छोटी चम्मच (पेस्ट) या 1 इंच टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)

7.     जीरा- ½ छोटी चम्मच

8.     हींग- 1 से 2 पिंच

9.     हल्दी पाउडर- ¼ छोटी चम्मच से कम (आप चाहे तो)

10.   लाल मिर्च पाउडर- ¼ छोटी चम्मच से कम

11.   नमक- ¾ छोटी चम्मच या स्वादानुसार

बनने की विधि

सबसे पहले पालक को काट कर कम से तीन बार धो लीजिएं। फिर एक कड़ाही में तेल गर्म करें। जब तेल गर्म हो जाए तो इसमें जीरा डालें। जीरे के बाद इसमें  हींग, हरी मिर्च, अदरक और हल्दी पाउडर डाल दीजिए और मसाले को हल्का सा भून लीजिए।

इसके बाद इसमें पालक और टमाटर को चार टुकडों में काट कर डाल दीजिए। जब पालक हल्के नर्म हो जाएं तो इसमें नमक और लाल मिर्च भी मिला दीजिएं। कुछ देर बाद आप देखेंगे कि पालक पानी छोड़ने लगा है। अब पालक को बिना ढ़के पकाएं ताकि पानी सूख जाए। पांच-दस मिनट बाद जब पानी सूख जाए तो समझ जाइएं कि आपकी सब्जी तैयार है।

मालपुआ बनाने की रेसिपी

1.     1 कप मैदा या आटा

2.     1 कप खोया (कद्दूकस किया हुआ)

3.     1/2-1 कप पानी

4.     एक चुटकी केसर

5.     तेल- एक कप

6.     काजू-पिस्ता और बादाम- सजाने के लिए (बारिक कटे हुए)

 

मालपुआ बनाने की वि​धि

सबसे पहले खोया में पानी डालकर उसका मोटा पेस्ट तैयार करें। फिर मैदे का बैटर यानि मोटा घोल बना लें। फिर दोनों को एक साथ मिला लें।

अब एक पैन में घी डालें। जब घी गर्म हो जाए तो उसमें एक बड़े चम्मच से यह मिश्रण डालें। एक साइड से पक जाने के बाद मालपुआ को पलट दीजिए। मालपुआ जब किनारे से लाल रंग के हो जाए तो समझ जाइएं कि यह तैयार हैं।

इन मालपुओं को एक प्लेट में निकाल लें। मालपुओं को अब चाशनी में डुबोना है। चाशनी से निकालने के बाद मालपुओं के ऊपर बादाम, पिस्ता और केसर डालकर सजाएं। लीजिएं आपका मालपुआ तैयार है।

 

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