होली

साल 2018 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 01 मार्च को शाम 06:16 से लेकर रात 08:47 तक का है  है। अगले दिन 02 मार्च  को रंगवाली होली खेली जाएगी।

होली है खुशियों का त्यौहार (Information of Holi in Hindi)


बसंत ऋतु के आते ही राग, संगीत और रंग का त्यौहार होली, खुशियों और भाईचारे के सन्देश के साथ अपने रंग-बिरंगी आंचल में सबको ढंक लेती है। हिन्दुओं का यह प्रमुख त्यौहार होली हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस पवित्र त्यौहार के सन्दर्भ में यूं तो कई कथाएं इतिहासों और पुराणों में वर्णित है, परन्तु हिन्दू धर्म ग्रन्थ विष्णु पुराण में वर्णित प्रहलाद और होलिका की कथा सबसे ज्यादा मान्य और प्रचलित है।
 

प्रहलाद और होलिका की कथा (Story of Holi in Hindi)

नारद पुराण की एक कथानुसार श्रीहरि विष्णु के परम भक्त प्रहलाद का पिता दैत्यराज हिरण्यकश्यप नास्तिक और निरंकुश था। उसने अपने पुत्र से विष्णु भक्ति छोड़ने के लिए कहा परन्तु अथक प्रयासों के बाद भी वह सफल नहीं हो सका। तदुपरांत हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे की भक्ति को देखते हुए उसे मरवा देने का निर्णय लिया। लेकिन अपने पुत्र को मारने की उसकी कई कोशिशें विफल रहीं इसके बाद उसने यह कार्य अपनी बहन होलिका को सौंपा। होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह कभी जल नहीं सकती। 
होलिका अपने भाई के कहने पर प्रहलाद को लेकर जलती चिता पर बैठ गई। लेकिन इस आग में प्रहलाद तो जला नहीं पर होलिका जल गई। तभी से इस त्यौहार के मनाने की प्रथा चल पड़ी है।

होली - रंगों का त्यौहार (Holi Festival of Colors)

होली के अवसर पर सतरंगी रंगों के साथ सात सुरों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इस दिन रंगों से खेलते समय मन में खुशी, प्यार और उमंग छा जाते हैं और अपने आप तन मन नृत्य करने को मचल जाता है। दुश्मनी को दोस्ती के रंग में रंगने वाला त्यौहार होली देश का एकमात्र ऐसा त्यौहार है, जिसे देश के सभी नागरिक उन्मुक्त भाव और सौहार्दपूर्ण तरीके से मानते हैं। इस त्यौहार में भाषा, जाति और धर्म का सभी दीवारें गिर जाती है, जिससे समाज को मानवता का अमूल्य सन्देश मिलता है।


होली की पूजा विधि के लिए यहां क्लिक करे: Holi Puja Vidhi

होलिका दहन के दिन करे ये अचूक उपाय मिलेगी सुख-समृद्धि और रोगो से मुक्ति​

 

होली की रेसिपि (खानपान) Recipe of Holi

मावा गुजिया रेसिपी

होली का नाम आए और गुजिया शब्द ना सुनाई दे ऐसा हो ही नहीं सकता है। कोई इसे गुजिया कहता है तो कोई गुझिया (Gujhiya), पर नाम से क्या फर्क पड़ता है आखिर है तो यह एक मिठास की पहचान। होली के मौके पर अगर आप भी इन गुजियों को अपने घर पर बनाना चाहते हैं, तो हम आपके लिए लेकर आयें हैं मावा गुजिया रेसिपी। यह ना केवल बनाने में आसान है बल्कि बनाने के बाद आप इसे बिना फ्रिज में रखे हुए कई दिनों तक उपयोग में ला सकते हैं। तो आइए जानते हैं, गुजिया बनाने की विधि।

मावा गुजिया बनाने की विधि (Mava Gujia Recipe in Hindi)

(बनाने का समय: लगभग 55 मिनट)

आवश्यक सामग्री:

गुजिया में भरने के लिए-

मावा/खोया-  400 ग्राम

शक्कर- 400 ग्राम (बारिक पिसी हुई)

सूजी- 100 ग्राम

सूखा नारियल- 100 ग्राम

काजू- 100 ग्राम (छोटे-छोटे काटे हुए)

किशमिश- 50 ग्राम (डंठल रहित)

घी- 02 बड़े चम्मच

छोटी इलाइची- 08 (छील कर कूटी हुई)

 

गुजिया का आटा तैयार करने के लिये-

मैदा- 500 ग्राम

दूध- 50 ग्राम

घी- 125 ग्राम (आटे में डालने के लिए ताकि आटा नर्म रहे)

घी या रिफाइंड - गुजिया तलने के लिये

भरावन की तैयारी

आपको सबसे पहले गुजियों में भरने के लिए भरावन तैयार करना है। इस काम के लिए आप एक भारी तले की कड़ाही लें। कड़ाही ना होने पर आप नॉन स्टिक बर्तनों का भी प्रयोग कर सकते हैं। अब इसमें मावा (खोया) को हल्का भूरा होने तक भूने। जब यह भुन जाए तो इसे एक अलग बर्तन में निकाल लें। इसके बाद कड़ाही में घी डालें और सूजी को भी हल्का ब्राउन होने तक भून लें। भुन जाने के बाद मावा (खोया), सूजी, शक्कर और मेवों को अच्छी तरह से मिला लीजिए। यह आपका भरावन तैयार हो गया है।

अब गुजिया बनाने के आटा की तैयारी करनी है। सबसे पहले घी को पिघलाकर, छने हुए मैदा में डाल कर अच्छी तरह से मिला लें। इसके बाद आटे में दूध और पर्याप्त मात्रा में पानी डालकर थोड़ा कड़ा आटा गूथ लें। गुथे हुए आटे को एक बर्तन में रख कर गीले कपड़े से ढ़क कर आधे घंटे के लिए रख दें। ऐसा करने से आटा सूखता नहीं है। आधे घंटे के बाद आटे को एक बार फिर हल्के हाथों से गूथे और इसकी छोटी-छोटी लोई बना लें। इसके बाद एक-एक लोई लें और उसे पूरी के आकार में बेल लें।

अब एक-एक पूरी को उठाएं और उसके बीच में दो बड़े चम्मच भरावन का सामान रख कर पूरी को बीच से पलट दें और किनारे के सिरों को मोड़ कर बंद कर दें। आप चाहें तो इसके लिए गुजियों (Gujia)  के सांचे का भी प्रयोग कर सकते हैं जो मार्केट में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

सारी गुजिया भरने के बाद कड़ाही में घी या रिफाइंड तेल गरम करें। तेल गर्म होने पर आंच को मीडियम कर दें और उसमें जितनी गुजिया आराम से तल सकें, उतनी डालें और हल्की भूरी होने तक तल लें।

अब आपकी स्वादिष्ट मावा गुजिया तैयार हैं। होली के मौके पर इस शानदार डिश को अपने मेहमानों को खिलाएं। आप इन्हें किसी एयर टाइट डब्बे में रखकर कई सप्ताह तक प्रयोग कर सकते हैं। 

 

होली रेसिपी: ठंडाई

होली का नाम आते ही लोगों के दिलों में ठंडाई का नाम आना लाजिमी हो जाता है। यूं तो होली में भांग की ठंडाई का चलन है लेकिन इसका असली आनंद हो इसकी ठंडक है। आप बाजार से तैयार ठंडाई भी खरीद सकते हैं लेकिन इसमें घर में बनी हुई ठंडाई का आनंद नहीं होगा। आइएं जानें कैसे बनाएं ठंडाई

ठंडाई रेसिपी (Thandai Recipe in Hindi)

पानी- 2 कप

चीनी- 4 कप

दूध- 1 कप

बादाम- 1 चम्‍मच

खरबूजे के बीज- 1 चम्‍मच

खसखस- 1/2 कप (50 ग्राम)

गुलाब जल- 2 टेबल स्पून

छोटी इलाइची- 30 - 35 (छील कर बीज निकाले हुए)

बनाने की विधी

एक कड़ाही या फ्राइंग पैन लेकर उसमें आधा लीटर पानी और चीनी डाल कर उसे गर्म करें। अब इस मिश्रण को 2 घंटों के लिए ठंडा होने के लिए रख दें। एक कटोरा लें और उसमें दो कप पानी के साथ सारी सामग्रियां डाल कर दो घंटे तक भिगो दीजिएं।

दो घंटे बाद इस सामग्रियों का पेस्‍ट तैयार कर लें। अब इस पेस्‍ट का अतिरिक्त पानी निकाल लीजिएं, इसके लिए आप पेस्ट को मलमल के कपडे में छान सकते हैं। पेस्ट को पानी के घोल में मिलाएं। घोलने के बाद एक बार फिर छानिएं ताकि सभी बड़े कण निकल जाएं।

अब इस मिश्रण को फ्रिज में 2-3 घंटों के लिए रख दें। जो भी महमान आए उसे दूध में मिलाकर और ऊपर से ग्रानिश के लिए कुछ बादाम छिडक कर पिलाएं।
 


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