गणेशोत्सव

गणेशोत्सव हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की सबसे अधिक धूम देखने को मिलती है। यह पर्व महाराष्ट्र का प्रतीक बन चुका है। इसे गणेश महोत्सव भी कहा जाता है। इस दौरान प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा की जाती है। यह त्यौहार (Ganesh Utsav) पूरे 10 दिनों तक बड़े धूम- धाम से मनाया जाता है।

गणेशोत्सव (Ganesh Utsav)


गणेशोत्सव (Ganesh Utsav) का त्यौहार वैसे को पूरे भारत देश में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है।  इस साल 2018 गणेश उत्सव 12 सितंबर से 23 सितंबर तक चलेगा। 

गणेशोत्सव से जुड़ी पौराणिक कथा (Ganesh Utsav Katha)

नारद पुराण की एक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक बालक की जीवंत मूर्ति बनाई। इसके बाद उन्होंने उस बालक का नाम गणेश रखा तथा उसे द्वार पर "यह कहकर खड़ा कर दिया की 'मैं स्नान करने जा रही हूं' वह इस बीच किसी को अंदर न आने दे"।

उन्होंने माता की आज्ञा का पालन करते हुए जब भगवान शिव को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया, तो क्रोध में आकर शिव जी ने बालक का गला धड़ से अलग कर दिया। जब माता पार्वती को यह बात पता चली तो वह विलाप करने लगीं।


इसके बाद भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर उस बालक के शरीर में जोड़कर उसे पुनः जीवित कर दिया। उसी दिन को भगवान श्री गणेश के जन्म उत्सव के रूप में आज मनाया जाता है।

गणेश प्रतिमा की स्थापना (Vindication of Ganesh Statue)

गणेश उत्सव के प्रथम दिन लोग गणेशजी की मूर्तियों की अपने घरों में स्थापित करते हैं। इसके उपरांत दस दिनों तक भगवान की पूरे विधि-विधान से पूजा करके उनसे सुख- शांति, समृद्धि आदि

मंगलकामना करते हैं। इस दौरान महाराष्ट्र में भगवान गणेश की मंगलमूर्ति, गणपति और सिद्धीविनायक आदि नाम से पूजा की जाती है। पूजा की समाप्ति पर मूर्ति विसर्जन किया जाता है।

गणेश उत्सव पूजा विधि (Ganesh Utsav Puja Vidhi)

गणेश उत्सव के पहले दिन प्रातः स्नान कर 'मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायक पूजनमहं करिष्ये' का जाप करते हुए शक्तिनुसार सोने, तांबे, मिट्टी या गोबर की गणेश प्रतिमा बनानी चाहिए। जल भरे हुए

कलश पर कपड़ा बांधकर गणेश प्रतिमा को उस पर स्थापित कर, सिंदूर चढ़ते हुए उनकी आरती करनी चाहिए।

इसके बाद भगवान को 21 मोदक का भोग लगाते हुए 5 मोदक गणेश जी के पास रखें तथा बचे हुए मोदक को ब्राह्मण को दान कर दें। इसी प्रकार दस दिन तक फूल, धूप, दीप, कपूर, रोली, चंदन, मोदक,

दूर्वा आदि से गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय तुलसी पत्तों का प्रयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए।

गणेश प्रतिमा का विसर्जन (Ganesh Visarjan Muhurat)

इस प्रकार दस दिन तक श्रद्धाभाव से गणेश पूजन करने के बाद ग्यारहवें दिन गणेश मूर्ति का विसर्जन नदी, तालाब या समुद्र में बड़े धूम- धाम से किया जाता है। इस उत्सव के दौरान की जाने वाली गणेशजी की महाआरती और पुष्पांजलि का अद्भुत नजारा मन को मोह लेता है।

गणेश उत्सव की मान्यता (Assumption of Ganesh Utsav)

मान्यतानुसार जो व्यक्ति दस दिनों तक श्रद्धाभाव एवं विधि-विधान से भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन की सभी बाधाएं समाप्त हो जाती है। विघ्नहर्ता श्री गणेश अपने भक्तों के सारे कष्ट हर लेते है तथा उन पर सौभाग्य, समृद्धि और सुखों की वर्षा करते हैं।

व्रत के लिए स्पेशल डोसा रेसिपी

गणेशोत्सव का पर्व भारतवर्ष में बेहद धूम-धाम के साथ मनाया जाता है विशेषकर महाराष्ट्र में

। इस पावन पर्व के अवसर पर हम आपके लिए लेकर आएं है दो ऐसी रेसिपी जिन्हें आप गणेशोत्सव के दौरान बनाकर खा सकते हैं। यह दोनों रेसिपीज व्रत के लिए अनुकूल हैं।

व्रत में समा और सिंघाड़े के आटे का डोसा बनाने की रेसिपी

जरूरी सामग्री

समा के चावल- एक कप

सिंघाड़े का आटा- आधा कप

घी- दो चम्मच

सेंधा नमक- आवश्यकतानुसार

1 हरी मिर्च और थोड़ी धनिया बारीक कटी हुई

डोसा बनाने की विधि

व्रत के दिन किसी भी खाद्य सामग्री को बनाने से पहले स्वच्छता सबसे अहम होती है। सबसे पहले समा के चावल को साफ करके पानी में भिगोकर रख दें। इससे इसे पीसने में आसानी होगी।

अब करीब दो-तीन घंटे बाद एक मिक्सर में सारे चावलों को पीस लें। अब पिसे हुए चावल में सिंघाड़े का आटा मिक्‍स करकर थोड़ा पानी और डालकर मशीन एक मिनट के लिए चला दें। ध्यान रखें कि डोसे का बैटर (घोल) ज्यादा कड़ा ना हो अन्यथा यह तवे पर लग सकता है, इसे हलका पतला होना चाहिए।

अब इस घोल में सेंधा नमक और बारीक कटी हरी मिर्च और धनिया मिला दीजिएं।

अब एक तवा गर्म करें और उसपर घी गर्म करें। ध्यान रहे कि तवे पर घी ज्यादा ना हो। एक चम्मच की मदद से डोसे के बैटर को तवे पर फैलाइयें। जब यह एक तरफ से हल्का सुनहरा हो जाए तो इसे पलट दीजिए। दूसरी तरफ से पकने के बाद आपका डोसा तैयार है। अब इसे सर्व करें। आप इसमें आलू को मैश करके भी डाल सकते हैं। इसे नारियल की सादी चटनी के साथ खाएं।

दही और आलू की व्रत वाली सब्जी बनाने की रेसिपी

दही वाले आलू की सब्जी बनाने की सामग्री

आलू - 300 ग्राम

दही - 125 ग्राम (फैंटा हुआ)

घी - 2 चम्मच

दो टमाटर- बारिक कटे हुए

हरा धनिया - बारीक कटा हुआ

हरी मिर्च- 2-3 (बारीक कटी हुई)

जीरा –  आधा चम्मच

धनिया पाउडर - आधा चम्मच

हल्दी पाउडर – एक चौथाई चम्मच

लाल मिर्च पाउडर – एक चौथाई चम्मच

सेन्धा नमक - स्वादानुसार

 

दही वाले आलू की सब्जी बनाने की विधि

सबसे पहले आलूओं को उबालकर छिल लीजिएं। अब एक कड़ाही में घी गर्म करें और इसमें जीरा डाल कर भूनिये।

जीरा भुनने के बाद धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर और बारीक कटी हरी मिर्च डाल दीजिये। जब मसाले अच्छी तरह से भून जाएं तब इसमें आलूओं को हाथ से मोटा-मोटा तोड़ कर डाल दीजिएं।

अब सब्जी में दो कप पानी डालकर उबाल आने तक पकने दीजिएं। उबाल आने पर लाल मिर्च डाल कर मिला दीजिए।

अब आप सब्जी में दही को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डालते रहें और सब्जी को हिलाते रहें। दही को धीरे-धीरे ही डालें। दही डालते समय आप इसे पानी डालकर थोड़ा-सा ढ़ीला कर सकते हैं।

सब्जी में उबाल आने पर इसमें सेन्धा नमक डालकर मिला दीजिए और सब्जी को 5 मिनट के लिए पकने दीजिएं।  अंत में कते हुए धनिया से इसे सजाकर सर्व करें। आप इसे कुट्टू के आटे की पुड़ियों या समां के चावल के साथ खा सकते हैं।


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