चैत्र नवरात्रि और ख़ास उपाय

नमाज़ का समय

दशहरा

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। सम्पूर्ण भारत में यह त्यौहार उत्साह और धार्मिक निष्ठा के साथ मनाया जाता है। विष्णु जी के अवतार के द्वारा अधर्मी रावण को मारे जाने की घटना को याद करते हुए हर साल यह त्यौहार (Dushhera) मनाया जाता है। 

दशहरा (Dushhera)

इस वर्ष दशहरा 19 अक्टूबर 2018 को मनाया जाएगा। इस विजयदशमी विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से लेकर 02 बजकर 43 मिनट तक का है। इस दौरान अपराजिता पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि विजय मुहूर्त के दौरान शुरु किए गए कार्य का फल सदैव शुभ होता है। 

 

दशहरे का धार्मिक महत्व (Dussehra Information)

मान्यता है कि इस दिन श्री राम जी ने रावण को मारकर असत्य पर सत्य की जीत प्राप्त की थी, तभी से यह दिन विजयदशमी या दशहरे के रूप में प्रसिद्ध हो गया। दशहरे के दिन जगह-जगह रावण-कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं। 

देवी भागवत के अनुसार इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस को परास्त कर देवताओं को मुक्ति दिलाई थी इसलिए दशमी के दिन जगह-जगह देवी दुर्गा की मूर्तियों की विशेष पूजा की जाती है। 

पुराणों और शास्त्रों में दशहरे से जुड़ी कई अन्य कथाओं का वर्णन भी मिलता है। लेकिन सबका सार यही है कि यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।


यह भी मान्यता है की नवरात्री के 9 दिनों को तीन गुणों से वर्गीकृत किया जाता है: तामस राजस और सत्त्व। पहले तीन दिन तामस से जुड़े है जिसमे उग्र प्रकार की देवियाँ जैसे काली और दुर्गा आती है। अगले तीन दिन देवी लक्ष्मी से सम्बंधित है। और आखरी के तीन दिन देवी सरस्वती से सम्बंधित है जो सत्त्व की परिचायक है। नवरात्री खत्म होने के बाद दसवे दिन को विजयादशमी आती है। इसका अर्थ यह है की मनुष्य ने नवरात्री की तीन गुणों पर विजय प्राप्त कर ली है। क्यूंकि मनुष्य ने इन तीनो गुणों को समझा लेकिन किसी भी गुण के सामने समर्पण नहीं किया इसीलिए दसवे दिन को विजय का दिन या विजयादशमी कहा जाता है। इससे यह साबित होता है की हमारे जीवन की महतवपूर्ण मामलों पर श्रध्दा और कृतज्ञता से ध्यान देने से हम सफलता और जीत हासिल कर सकते है।    

 

दशहरा पूजा विधि (Dussehra Puja Vidhi)

दशहरे के दिन कई जगह अस्त्र पूजन किया जाता है। वैदिक हिन्दू रीति (Dussehra Puja Vidhi) के अनुसार इस दिन श्रीराम के साथ ही लक्ष्मण जी, भरत जी और शत्रुघ्न जी का पूजन करना चाहिए। 
इस दिन सुबह घर के आंगन में गोबर के चार पिण्ड मण्डलाकर (गोल बर्तन जैसे) बनाएं। इन्हें श्री राम समेत उनके अनुजों की छवि मानना चाहिए। गोबर से बने हुए चार बर्तनों में भीगा हुआ धान और चांदी रखकर उसे वस्त्र से ढक दें। फिर उनकी गंध, पुष्प और द्रव्य आदि से पूजा करनी चाहिए। पूजा के पश्चात ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य वर्ष भर सुखी रहता है।

दशहरा स्पेशल रेसिपी (आलू लच्छा नमकीन):

दशहरे के दिन शाम के समय बाहर घूमने-फिरने का प्लान करते हैं। अगर इस दिन खाने की बात करें तो लोग जलेबी विशेष रूप से खाना पसंद करते हैं इसके अतिरिक्त नवरात्र के समाप्त होने पर कुछ हल्का नमकीन भी लेना पसंद करते हैं। तो चलिए आज हम आपको एक ऐसी रेसिपी बताने जा रहे हैं जो चटपटी होने के साथ नवरात्र के नौ दिनों के व्रत के बाद आपके पेट पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं डालेगी।


 

आलू लच्छा नमकीन

 

व्रतों में अधिकतर आलू का इस्तेमाल किया जाता है। आलू लच्छा नमकीन बेहद ही कुरकुरी, स्वादिष्ट और  व्रतों के लिए पौष्टिक आहार हो सकता  है। आइए जानते हैं इसे बनाने की विधि।

 

आवश्यक सामग्री -

1.     आलू- 4 -5 (लगभग आधा किलो) 

2.     मूंगफली के दाने- 200 ग्राम

3.     सेन्धा नमक- 1 चम्मच

4.     काली मिर्च पाउडर- 1 चम्मच

5.     तेल- दो-चार चम्मच

बनाने की विधि -

आलू को अच्छी तरह से धोकर सूखा लीजिए। इसके बाद इन्हें छील कर मोटा कद्दूकस कर लीजिए। इसके बाद आपको जो लच्छे मिले उन्हें भी धो लीजिएं। अब इन्हें अच्छे तरीके से छलनी में छानकर किसी सूखे कपडे या साफ़ तोलिये से पौंछ लीजिए ताकि सारा अतिरिक्त पानी खत्म हो जाए।

अब एक कड़ाही में थोड़ा-सा तेल गरम कीजिए। जब तेल गरम हो जाए तो इसमें  लच्छे का एक टुकड़ा डालकर चैक कर लीजिए कि तेल सही से गर्म हुआ है या नहीं। अब इसमें जितने लच्छे आ सकते हैं उतने डालकर धीमी आंच पर पकने दीजिए। थोड़ी देर में तेल में झाग बनने लगेंगे। जैसे ही यह झाग थोड़े कम हों इन लच्छों को करछी चला लीजिए।

जब यह थोड़े क्रिस्पी हो जाएं तो छलनी से छान लीजिए ताकि बाकि का तेल वापस कड़ाही में चला जाए। फिर इन्हें किसी बर्तन पर दूसरी छलनी रख कर डाल दीजिए जिससे की बचा हुआ तेल भी निकल जाए। आपके आलू के  लच्छे  तैयार हैं।

अब कड़ाही में बचे हुए तेल में  मूंगफली के दाने डालिये। इनको करछी से चलाते हुए तब तक भूनिये जब तक कि इनका रंग न बदल जाए। मूंगफली को लगभग 3 से 5 मिनट तक तलना है। रंग बदलते ही आपकी मूंगफली भी तैयार हैं। इन्हें भी छलनी में  छान लीजिए।

 

अब मूंगफली के दानों और आलू के लच्छों को किसी एक बर्तन में डाल कर इसमें काली मिर्च पावडर और सेंधा नमक डालकर अच्छे से मिला दीजिए। लीजिएं आपके आलू लच्छा नमकीन तैयार है।

आप चाहें तो मूंगफली के स्थान पर अन्य ड्राई फ्रूट्स का भी प्रयोग कर सकते हैं।


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