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दिवाली

दिवाली हिन्दू धर्म का मुख्य पर्व है। रोशनी का पर्व दिवाली कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। दिवाली को दीपावली (Deepawali) के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि दीपों से सजी इस रात में लक्ष्मीजी भ्रमण के लिए निकलती हैं और अपने भक्तों को खुशियां बांटती हैं। दिवाली मनाने के पीछे मुख्य कथा (About Diwali in Hindi) विष्णुजी के रूप भगवान श्री राम से जुड़ी है। 

 

दिवाली (Diwali)
इस साल दीपावली या दिवाली 07 नवंबर, 2018 को मनाई जाएगी।  वर्ष 2018 में नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली नवंबर 06 मनाई जाएगी।

यह माना जाता है कि जब भगवान राम अयोध्या पहुंचे थे तब पूरे शहर को हजारों तेल के दीपकों (दीया) को जला कर उनका स्वागत किया गया था। पूरी अयोध्या को फूलों और सुंदर रंगोली से सजाया गया था। तब से, दिवाली को रोशनी का त्योहार कहा जाता है। भगवान राम का अपने घरों में स्वागत करने के लिए लोग तेल के लैंप के साथ सजावट करते हैं यही कारण है कि इस त्योहार को 'दीपावली' भी कहा जाता है। तेल के दीयों की परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लोग अपने घरों के प्रवेश द्वार पर सुंदर रंगोली और पादुका (पादलेख) चित्रण करके देवी लक्ष्मी का स्वागत करते हैं। दिवाली के त्योहार को मनाने के लिए लोग दोस्तों, रिश्तेदार और पड़ोसियों को मिठाई और फल बांटते है। 

दिवाली का जश्न पांच दिनों की अवधि में फैला हुआ है जिसमे प्रत्येक दिन का अपना महत्व है और जिसमे परंपरागत अनुष्ठानों का पालन किया जाता है। जश्न 'धनतेरस' के साथ आरम्भ होता है, यह वह शुभ दिन है जिसमे पर लोग बर्तन, चांदी के बर्तन या सोना खरीदते हैं। यह माना जाता है कि नए "धन" या कीमती वास्तु की खरीदार शुभ हैं। इसके बाद छोटी दिवाली आती है जिसमें बड़ी दिवाली की तैयारी होती है। लोग अपने घरों को सजाने की शुरुआत करते हैं, और एक दुसरे से मिलते-जुलते है। अगले दिन बड़ी दीवाली मनाई जाती है। इस दिन, लोग लक्ष्मी पूजा करते हैं, मिठाई और उपहार के साथ एक दूसरे के घर जाते हैं, पटाखे जलाते हैं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताते हैं। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है और अंततः पांच दिवसीय उत्सव भाई दूज के साथ समाप्त होता है जहां बहने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और भाई बहन एक-दूसरे की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं।

छोटी दिवाली के पीछे की कहानी।

दंतकथाओं के अनुसार नरकासुर नाम का एक राक्षस था जो प्रागज्योतिषपुर राज्य का राजा था। उसने इंद्र को युद्ध में परास्त करके माँ देवी की कान की बालियों को छीन लिया था। येही नहीं उसने देवताओं और रिशिओं की 16 हज़ार बेटियों का अपहरण करके उनको अपने इस्त्रिग्रह में बंदी बना रखा था। इस्त्रियों के प्रति नरकासुर के द्वेष को देख कर सत्यभामा ने कृष्णा से यह निवेदन किया की उन्हें नरकासुर का वध करने का अवसर प्रदान किया जाये। यह भी मान्यता है की नरकासुर को यह श्राप था की उसकी मृत्यु एक इस्त्री के हाथ ही होगी। सत्यभामा कृष्ण द्वारा चलाय जा रहे रथ में बेठ कर युद्ध करने के लिए गयी। उस युद्ध में सत्यभामा ने नरकासुर को परास्त करके उसका वध किया और सभी कन्याओं को छुडवा लिया।

इसी दिन को नरका चतुर्दशी कहते है। छोटी दिवाली भी इसी दिन मनाई जाती है। इसका कारण यह है ही नरकासुर की माता भूदेवी ने यीह घोषणा की थी की उसके पुत्र की मृत्यु के दिन को मातम के तौर पर नहीं बल्कि त्यौहार के तौर पर याद रखा जाये।​



दीपावली पर्व के पीछे कथा (Story of Deepawali in Hindi)
अपने प्रिय राजा श्री राम के वनवास समाप्त होने की खुशी में अयोध्यावासियों ने कार्तिक अमावस्या की रात्रि में घी के दिए जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से हर वर्ष दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस त्यौहार का वर्णन विष्णु पुराण के साथ-साथ अन्य कई पुराणों में किया गया है।

 

दीपावली पर लक्ष्मी पूजा (Deepawali Pooja Vidhi Hindi)
अधिकांश घरों में दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा (Laxmi Puja on Diwali) की जाती है। हिन्दू मान्यतानुसार अमावस्या की रात्रि में लक्ष्मी जी धरती पर भ्रमण करती हैं और लोगों को वैभव का आशीष देती है। दीपावली के दिन गणेश जी की पूजा का यूं तो कोई उल्लेख नहीं परंतु उनकी पूजा के बिना हर पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए लक्ष्मी जी के साथ विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की भी पूजा की जाती है। 


दीपदान (Deepdan in Hindi)
दीपावली के दिन दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। नारदपुराण के अनुसार इस दिन मंदिर, घर, नदी, बगीचा, वृक्ष, गौशाला तथा बाजार में दीपदान देना शुभ माना जाता है। 
मान्यता है कि इस दिन यदि कोई श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है तो, उसके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होता। इस दिन गायों के सींग आदि को रंगकर उन्हें घास और अन्न देकर प्रदक्षिणा की जाती है। 


दीपावली पर्व भारतीय सभ्यता की एक अनोखी छठा को पेश करता है। आज अवश्य पटाखों की शोर में माता लक्ष्मी की आरती का शोर कम हो गया है लेकिन इसके पीछे की मूल भावना आज भी बनी हुई है। 

दीपावली पर बनने वाली मिठाइयां


दीपावली यानि दीपों और मिठाइयों का त्यौहार। लेकिन दीपावली के दिन मन की सबसे बड़ी उलझन यही होती है कि मिलावट के इस दौर में अपनों को कैसे मिलावटी मिठाइयां खिलाएं। अगर आप भी इस उलझन से जुझ रहे हैं तो हम आपके लिए दो ऐसी रेसिपीज लेकर आये है, जिसे आप घर पर आसानी से बना भी सकते हैं और प्रसाद के साथ इसका उपयोग दोस्तों और रिश्तेदारों को बांटने में भी कर सकते हैं।

बेसन का लड्डू बनाने की रेसिपी:

लड्डू भगवान गणेश जी का प्रिय भोग है जिनकी दीपावली के लक्ष्मी जी के साथ पूजा की जाती है। बेसन के लड्डू, दीपावली पर बनने वाली खास और परम्परागत मिठाई है. आइयें जानें घर पर कैसे बनाएं बेसन के लड्डू।

आवश्यक सामग्री:

1.   बेसन: 500 ग्राम,

2.   शक्कर: 500 ग्राम,

3.   घी: 400 ग्राम,

4.   दूध: 01 बड़ा चम्मच,

5.   इलायची पावडर: एक चौथाई चम्मच

6.   काजू और बादाम: सजावट के लिए

बनाने की विधि

सबसे पहले बेसन को छान लें। इसके बाद कढ़ाई में घी गर्म करें। जब घी गर्म हो जाए तो उसमें बेसन डाल दें और भूनें। जब बेसन का रंग भूरा होने लगे तो उसमें कुछ बूंदें पानी की डालें, इससे बेसन का स्वाद और रंग निखरता है।

 

जब बेसन भून जाए तो भूने हुये बेसन को ठंडा करने के लिये अलग से प्लेट में निकाल लीजिए। अब इसमें काजू और बादाम को बारीक काट करमिला लीजिएं। इसमें इलायची पावडर और चीनी का भूरा भी मिला लीजिएं। लड्डू बनाने के लिए बेसन तैयार है।

अब हाथों पर हल्का पानी या तेल लगाकर मनचाहे आकार में लड्डू बना लीजिएं। इन्हें कुछ देर के लिए हवा में खुला रहने दें। लीजिएं आपके बेसन के लड्डू तैयार हैं।

 

कलाकंद बनाने की रेसिपी

दीपावली पर खाई जाने वाली एक और बेहद लोकप्रिय रेसिपी है कलाकंद। कलाकंद दूध से बनती है जिस कारण मां लक्ष्मी और सरस्वती जी को भोग लगाने के लिए इसे शुद्ध माना जाता है। आइयें जानें कैसे बनाएं कलाकंद।

आवश्यक सामग्री

1.   दूध - 2 लीटर

2.   सिरका - या नीबूका रस - 2-3 टेबल स्पून

3.   पाउडर चीनी - 100 ग्राम (1/2 कप)

4.   इलाइची पावडर – आधा चम्मच

5.   पिस्ता -10 -12 (बारीक कटे हुए)

6.   बादाम - 5-6 (बारीक कटे हुए)

बनाने की विधि

सबसे पहले दूध को दो बर्तनों में गर्म होने के लिए रखें। एक लीटर दूध को तो आपको तब तक पकाना है जब तक कि वह आधा ना हो जाए।

दूसरे एक लीटर दूध को एक बार उबाल आने पर उतार लीजिएं। अब इसमें कुछ बूंदें सिरके या नींबू के रस की डाल दीजिएं। इससे छेना अलग हो जाएगा। छैना को मोटे साफ कपड़े में छान कर अतिरिक्त पानी निकाल दीजिये।

जब गर्म होने के लिए रखा हुआ दूध उबलकर आधा हो जाए तो उसे छैना में मिलाकर फिर से गर्म कीजिए ताकि वह और गाढ़ा हो सके। जब यह बर्फी बनाने लायक गाढ़ा हो जाए तो इसे एक प्लेट में निकाल लीजिएं।

इसके ऊपर कटे हुए पिस्ता और बादाम डाल लीजिएं। जब यह जम जाए तो इसे मनचाहे आकार में काट कर फ्रीज में जमने के लिए रख दीजिएं। इसे जमने में कुछ समय लग सकता है। लीजिएं आपके स्वादिष्ट कलाकंद तैयार हैं। अगर आपको मीठा पसंद है तो दूध गर्म करते समय उसमें स्वादानुसार चीनी भी मिला सकते हैं।

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दीपावली पूजा विधि जानने के लिए यहां क्लिक करें: Diwali Puja Vidhi in Hindi
लक्ष्मी जी के विशेष मंत्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: Laxmi Mantra in Hindi


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