चैत्र नवरात्रि और ख़ास उपाय

नमाज़ का समय

चैत्र नवरात्र

हिन्दू धर्म में माता दुर्गा को आदिशक्ति कहा जाता है। शक्तिदायिनी मां दुर्गा की आराधना के लिए साल के दो पखवाड़े बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। यह दो समय होते हैं चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) और शारदीय नवरात्र। चैत्र नवरात्र चैत्र माह में मनाया जाता है। जबकि शारदीय नवरात्र आश्विन माह में मनाया जाता है।

चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri)

इस साल चैत्र नवरात्र 18 मार्च से शुरू होंगे और 26 मार्च को खत्म होंगे। चैत्र नवरात्र की मुख्य तिथियां निम्न हैं:

18 मार्च 2018 (1st Day of Navratri): इस दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 29 मिनट से लेकर 08 बजकर 27 मिनट तक का है। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

19 मार्च 2018 (2nd Day of Navratri): नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।

20 मार्च 2018 (3rd Day of Navratri): नवरात्र के तीसरे दिन देवी दुर्गा के चन्द्रघंटा रूप की आराधना की जाती है। 

21 मार्च 2018 (4th Day of Navratri): इस साल माता के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा जी की आराधना की जाएगी। 

22 मार्च 2018 (5th Day of Navratri): नवरात्र के पांचवें दिन भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है।


23 मार्च 2018 (6th Day of Navratri):नारदपुराण के अनुसार शुक्ल पक्ष यानि चैत्र नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है।

24 मार्च 2018 (7th Day of Navratri):  नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।

25 मार्च 2018 (8th Day of Navratri): नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं।

26 मार्च 2018 (9th Day of Navratri): नौवें दिन भगवती के देवी सिद्धदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है। सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है।

 

चैत्र नवरात्र रेसिपी


1: नमकीन फलाहारी कुट्टू चॉप्स

नवरात्र के दौरान फलाहार के अलावा आप कुट्टू के आटे का सेवन भी कर सकते हैं। कुट्टू का आटा बेहद सादा होता है लेकिन आप इसे पकौड़ियों आदि में बदलकर स्वादिष्ट बना सकते हैं। तो चलिए आज जानते हैं कैसे बनाएं सादे कुट्टू के आटे की स्वादिष्ट फलाहारी चॉप्स।

नमकीन फलाहारी कुट्टू चॉप्स की रेसिपी (Kuttu Falahari Chops Recipe in Hindi)

सामग्री

200 ग्राम कुट्‍टू का आटा

200 ग्राम उबले आलू

2 हरी मिर्च

थोड़ा सा हरा धनिया

स्वादानुसार सेंधा नमक

तलने के लिए देसी घी

काजू और किशमिश के टुकड़े बारिक कटे हुए

बनाने की विधि

सबसे पहले कुट्‍टू के आटे को किसी बर्तन में छान लीजिएं। ऐसा करने से इसे गूंथना आसान हो जाएगा। अब इसमें एक-चौथाई चम्मच सेंधा नमक डालकर गूंथ लें।

दूसरी तरफ उबले हुए आलूओं को अच्छी तरह से मसल लें और आलुओं में काजू के टुकड़े, किशमिश, नमक, हरा धनिया, हरी मिर्च डालकर अच्छी तरह से मिला लीजिएं। इसके बाद मिले हुए सामग्री को बॉल की शक्ल में गोल-गोल बना लीजिएं।

आटे की लोईयों की पूरी बना लें। इसके बाद इसमें आलू का मिश्रण भरकर साइड से बंद कर दीजिएं। फिर इसे हल्के हाथों से दबाते हुए गोल आकार में कर दें।

अब एक कड़ाही या फ्राइंग पैन में घी को गर्म करें। अब बॉल्स को मध्यम आंच पर तलें। इन्हें गर्म-गर्म निकाल कर दही या टमाटर की चटनी के साथ खाएं। आप कुट्टू के आटे के स्थान पर सिंघाड़े के आटे का प्रयोग भी कर सकते हैं।

 

2:  लौकी का हलवा

चैत्र नवरात्र व्रत रेसिपी के इस अंक में हम आपके लिए लाए हैं लौकी का हलवा बनाने की रेसिपी।  लौकी उन सब्जियों में से है जिनका सेवन आप नवरात्र के दौरान कर सकते हैं। लौकी के हलवे का नाम सुनकर हो सकता है आपको थोड़ी हैरानी हो, लेकिन हम आपको बता दें कि यह ना केवल स्वादिष्ट है बल्कि सेहतमंद भी होती है।  आइयें जानें चैत्र नवरात्र के दौरान कैसे बनाएं लौकी का हलवा (Lauki Halwa Recipe )

 लौकी का हलवा बनाने की रेसिपी (Lauki Halwa Recipe in Hindi)

बनाने में समय: 20 मिनट

250 ग्राम ताजी लौकी (घीया)

तीन चम्मच घी

इलायची पावडर- आधा चम्मच

खोपरा बूरा- एक तिहाई कप

मावा- आधा कप

गुड़ या चीनी स्वादानुसार

बनाने की विधि (Lauki kaa Halwa Banane ke Vidhi)

सबसे पहले लौकी को छिलकर अच्छी तरह से कद्दुकस कर लें। अच्छा होगा अगर आप लौकी के बीजों  को निकालकर कद्दुकस करें, इससे हलवा स्वादिष्ट और जल्दी पकेगा।

एक कडाही में घी गरम करके उसमें कसी हुई लौकी डालें और धीमी आंच पर अच्छी तरह से पकाएं। फिर इसमें चीनी या गुड़ डालें और पकाते रहें। कुछ समय बाद लौकी का पानी निकलने लगेगा, इस समय आपको आंच तेज कर देनी चाहिए ताकि पानी जल्दी सूख जाए।

लौकी को हर कुछ मिनट पर पानी सूखने तक चलाते रहें। अब इसमें खोपरे का बूरा, मावा, इलायची पावडर और एक चम्मच घी डालकर पकने दें। हलवे को लगातार चलाते रहें। जब यह बनकर तैयार हो जाए तो आप इसे मावा की कतरनों से सजा कर सर्व कर सकते हैं।

नोट: गुड़ का प्रयोग करने से आप व्रत के दौरान शरीर पर चीनी के होने वाले दुष्प्रभावों से बच सकते हैं। इसे अन्य व्रतों में भी खाया जा सकता है। 

दशमहा विद्या की पूजा

देवी के 10 रूपो का वर्णन षोडश तंत्र मे किया गया है | शक्ति के यह रूप संसार के सृजन का सार है | इन शक्तियो की उपासना मनोकामना पूर्ति, सिद्धि प्राप्त करने के लिए की जाती है जिसकी उपासना से चतुर्मुख सृष्टि रचने की समर्थ होते है | विष्णु जिसके कृपा कटाक्ष से विश्व का पालन करने मे समर्थ होते है, रुद्र जिसके बाल से विश्व का संहार करने मे समर्थ होते है |

देवी के दस रूप

काली, तारा, षोड़शी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बाग्लामुखी, मातंगी ओर कमला | देवताओ के मंत्रो को मंत्र तथा देवीयो के मंत्रो को विधा कहा जाता है | इन मंत्रो का सटीक उचारण अति आवश्यक है | ये दस महाविद्याएँ भक्तो का भय निवारण करती है | जो साधक इन विधाओ की उपासना करता है, उसे धर्म, अर्थ, काम ओर मोक्ष सबकी प्राप्ति हो जाती है | इन  महाविधाओ की उपासना ग्रहों की शुभता की अभीवृद्धि के उद्देश्य से भी की जाती है |

काली

दस महाविधाओ मे काली प्रथम है | .भागवत के अनुसार महाकाली ही मुख्य है | उन्ही के उग्र ओर सोम्य दो रूपो मे अनेक रूप धारण करने वाली दस महाविद्याएँ है | कलयुग मे कल्पवृक्ष के समान शीघ्र फल देने वाली ओर साधक की समस्त मनोकामनाए पूर्ण करने मे सहायक है | शनि ग्रह के लिए काली की उपासना की जाती है |

तारा

भगवती काली को नीलरूपा ओर सर्वदा मोक्ष देने वाली तथा तारने वाली होने के कारण तारा कहा जाता है | भारत मे सबसे पहले महर्षि वशिष्ठ ने तारा की आराधना की थी | आर्थिक उन्नति ओर अन्य बाधाओ का निवारण हेतु तारा महविधा का स्थान महत्वपूर्ण है | अनायास की विपति , नाश, शत्रु, वाक शक्ति ओर मोक्ष की प्राप्ति के लिए तारा की उपासना की जाती है | ग्रहो मे गुरु ग्रह के लिए तारा की उपासना की जाती है |

षोड़शी

षोड़शी माहेश्वरी शक्ति की सबसे मनोहर श्रीविग्रह वाली सिद्ध देवी है | षोड़शी को श्रीविधा भी माना गया है | इनके ललिता, राज राजेश्वरी, महात्रीपुरसुन्दरी, बलपंचदशी आदि अनेक नाम है |  इनकी उपासना श्रीयंत्र के रूप मे की जाती है| ये अपने उपासक को भक्ति ओर मुक्ति दोनो प्रदान करती है | षोड़शी उपासना मे दीक्षा आवश्यक है | बुध ग्रह के लिए भी इनकी उपासना की जाती है |

भुवनेश्वरी

महा विधाओ मे भुवनेश्वरी महाविधा को आधशक्ति अर्थात मूल प्रक्रति कहा गया है | इसलिए भक्तो को अभय ओर समस्त सिद्धियां प्रदान करना इनका स्वाभाविक गुण है | भगवती भुवनेश्वरी की उपासना पुत्र प्राप्ति के लिए विशेष फलप्रद है | चंद्रमा ग्रह के लिए भी भुवनेश्वरी महाविधा की उपासना की जाती है |

छिन्नमस्ता

परिवर्तनशील जगत का अधिपति कबन्ध है ओर उसकी शक्ति छिन्नमस्ता है | इनका स्वरूप ब्रह्मांड मे सृजन ओर मृत्यु के सत्य को दर्शाता है | ऐसा विधान है की चतुर्थ संध्यकाल मे छिन्नमस्ता की उपासना से साधक को सरस्वती सिद्ध हो जाती है | राहु ग्रह के लिए छिन्नमस्ता की उपासना की जाती है |

त्रिपुर भैरवी

क्षियमान विश्व के अधीश्ठान दक्षिणमूर्ति कालभेरव है | उनकी शक्ति ही त्रिपुर भैरवी है | इनकी साधना की मुख्य विशेषता ये भी है की व्यक्ति के सौंदर्य मे निखारक आने लगता है ओर वह अत्यंत सुंदर दिखने लगता है | इनका रंग लाल है | ये लाल रंग के वस्त्र पहनती है | त्रिपुर भैरवी का मुख्य लाभ घोर कर्म मे होता है | जन्मपत्रिका मे लग्न के लिए इनकी उपासना की जाती है |

धूमावती

धूमावती महाशक्ति अकेली है तथा स्वयं नियंत्रिका है | इनका कोई स्वामी नही है | ये विधवा स्वरूप मई पूजी जाती है | धूमावती उपासना विपत्ति नाश, रोग, निवारण, युद्ध जय आदि के लिए की जाती है | यह लक्ष्मी की ज्येष्ठा है, अतः ज्येष्ठा नक्षत्र मे उत्पन्न व्यक्ति जीवनभर दुख भोगता है | उन्हे धूमावती साधना करनी चाहिए | केतु ग्रह के लिए धूमावती की उपासना की जाती है |

बाग्लामुखी

यह साधना शत्रु बाधा को समाप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साधना है | इनकी उपासना भोग ओर मोक्ष दोनो की सिद्धि के लिए की जाती है | इनकी उपासना मे हरिद्र माला, पीत पुष्प ओर पीतवस्त्र का विधान है | मंगल ग्रह के लिए भी इनकी उपासना लाभप्रद है |

मातंगी

मातंग शिव का नाम ओर इनकी शक्ति मातंगी है | ये असुरो को मोहित करने वाली ओर भक्तो को अभीष्ट फल देने वाली है | ग्रहस्थ जीवन को सुखमय बनाने के लिए मातंगी की साधना श्रेयस्कर है | सूर्य ग्रह की शुभता मे भी इनकी उपासना की जाती है |

कमला

जिसके घर मे दरिद्रता ने कब्जा कर लिया हो ओर घर मे सुख-शांति नही हो, आय का स्त्रोत नही हो, उनके लिए यह साधना सोभाग्य का द्वार खोल देती है | शुक्र ग्रह के लिए इनकी उपासना की जाती है |

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दौरान कैसे करें मां दुर्गा की पूजा: Navratri Puja Vidhi in Hindi
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