अनंत चतुर्दशी

श्रद्धालुजनों को संकटों से रक्षा करने वाला अनन्तसूत्र बंधन का त्यौहार अनंत चतुर्दशी हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) का पर्व 23 सितंबर 2018 को मनाया जाएगा। 

 


अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त  (Ananat Chaturdashi Puja Muhurat)

इस साल अनंत चतुदर्शी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:13 से लेकर दोपहर 31:17 तक चलेगा। (मुहूर्त दिल्ली समयानुसार है। )

 

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा (Ananat Chaturdashi Vrat Katha in Hindi)


भविष्य पुराण के अनुसार जुए में पांडव राजपाट हार कर जब जंगल में भटक रहे थे और कई प्रकार के कष्टों को झेल रहे थे तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी और उसी व्रत के प्रभाव से पांडव सभी कष्टों से मुक्त हुए और महाभारत के युद्ध में उन्हें विजयी की प्राप्ति हुई थी।

 

अनंत चतुर्दशी व्रत विधि (Anant Chaturdashi Puja Vidhi in Hindi)

इस दिन व्रती को प्रातः काल स्नान कर कलश की स्थापना कर कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करना चाहिए और फिर शास्त्रानुसार भगवान अनंत के साथ- साथ भगवान विष्णु और विघ्नहर्ता गणेश जी का आवाहन कर उनकी पूजा करनी चाहिए।

अनंत चतुर्दशी का पर्व हिंदू हिन्दुओं के साथ- साथ जैन समाज के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। जैन धर्म के दशलक्षण पर्व का इस दिन समापन होता है। जैन अनुयायी श्रीजी की शोभायात्रा निकालते हैं और भगवान का जलाभिषेक करते हैं। 

अनंत चतुर्दशी

भगवान श्री विष्णु जी की पूजा में केले का विशेष महत्व होता है। अनंत चतुर्दशी के इस पावन अवसर पर आइयें केले से बनने वाले एक आसान व्यंजन को बनाना सीखें। अनंत चतुर्दशी के मौके पर चलिए बनाना सीखें केले का हलवा। यह बहुत ही पौष्टिक, स्वादिष्ट और बनाने में आसान होता है।

आवश्यक सामग्री -

कच्चे केले का हलवा -

  1. कच्चे केले- 3
  2. चीनी- 150 ग्राम
  3. घी- 5-6 चम्मच
  4. दूध- 300 मि. ली़.
  5. काजू- 10-15
  6. बादाम- 10-15
  7. किशमिश - 15 - 20
  8. इलायची पावडर- ½  चम्मच

केले का हलवा बनाने की विधि -

सबसे पहले तीन केले लीजिएं और इन केलो के डंठल तोड़ लीजिए।  अब इन केलों को (छिलके समेत) एक कप पानी डालकर कुकर में उबाल लीजिए। जब इसमें एक सीटी आ जाए तो गैस को बंद कर दीजिए। ठंडा होने के बाद इन केलों को किसी प्लेट में निकाल लें। अब इनका छिलका उतार कर केलों को छोटे टुकड़ों में तोड़ कर कद्दूकस कर लीजिए। 

ड्राई फ्रूट्स को बारीक टुकड़ों में काटकर एक प्लेट में रख लें। 

 

गैस पर एक बर्तन रखकर उसमें 3-4 चम्मच घी डालकर गर्म करें। घी पिघलने पर इसमें कद्दूकस किया हुआ केला मिलाएं और धीमी आंच पर भून लीजिए। जैसे ही केले का रंग बदलने लगे तो इसमें दूध और चीनी मिला दीजिए। अब इस मिश्रण को उबलने दीजिए।

उबाल आने पर अब इसमें किशमिश , काजू और बादाम के टुकड़े डालकर अच्छी तरह से मिला लीजिए। इसे तब तक चलाते रहें जब तक कि यह गाढ़ा ना हो जाए। मिश्रण के गाढ़ा होते ही इसमें इलायची पावडर मिला दीजिए। लीजिए आपका कच्चे केले का हलवा तैयार है। आप इसमें ऊपर से कुछ चम्मच घी और ड्राई फ्रूट्स से सजाकर पेश कर सकते हैं।

कबाब-ए-केला रेसिपी (केले के कबाब बनाने की रेसिपी) 

कबाब एक पारंपरिक तो नहीं लेकिन व्रत के लिहाज से बेहतरीन डिश्स मानी जाती है। आइये आपको बताते हैं कि कैसे बनाएं केले के कबाब या कबाब-ए-केला।

 

सामग्री

  1. 250 ग्राम कच्चे केले
  2. 1 बड़ी इलायची
  3. ¼ कप कुट्टू का आटा
  4. 2 चम्मच सेंधा नमक
  5. 2 छोटे चम्मच धनिया के बीज़ (बारिक पीसे हुए)
  6. 1/2 चम्मच मिर्च पाउडर
  7. 2 चम्मच नींबू का रस
  8. एक (कटी हुई) हरी मिर्च
  9. 2 चम्मच धनिया (बारिक कटा हुआ)
  10. देसी घी

 

बनाने की विधि

सबसे पहले किसी भाप वाले बर्तन पर रखकर पका लीजिए। अगर ऐसा संभव ना हो तो कच्चे केले को छिलके सहित प्रेशर कूकर में रख दीजिए। जब केले नरम हो जाए तो इन्हें निकालकर ठंडा कर लीजिएं।

ठंडे होने के बाद इन्हें अच्छी तरह से मैश करें। अब कुट्टू के आटे, सेंधा नमक, मैश केले और अन्य सभी सामग्रियों को मिलाकर अच्छी तरह से गूंथ लीजिए।

अब इसे गोल-गोल कबाब या टिक्की की सूरत में बनाकर साइड रखते रहें। एक पैन या कड़ाही में घी गर्म करें। जब घी पूरी तरह से तैयार हो जाए तो कबाबों को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक फ्राई कर लीजिए।

लीजिए आपके स्वादिष्ठ कच्चे केले के कबाब तैयार हैं। इन्हें आप धनिया की व्रत वाली चटनी के साथ खा सकते हैं।


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