सती व्रत विधि - Sati Vrat Vidhi
व्रत विधि

सती व्रत विधि - Sati Vrat Vidhi

Dharm Raftaar

सती व्रत ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। यह व्रत परम उत्तम व्रत माना जाता है। इस दिन भगवान गणेश के अनिरुद्ध रूप की पूजा की जाती है। यह व्रत मनोवांछित फल देने वाला माना जाता है।

सती व्रत विधि (Benefits of Sati Vrat Vidhi in Hindi)

नारद पुराण के अनुसार सती व्रत का पालन करने वाली स्त्री को प्रातः उठकर संभवतः नदी में स्नान करना चाहिए। पूजा स्थान पर श्रद्धापूर्ण भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। गंध, फूल, धूप दीप, मिठाई आदि से विधिपूर्वक गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद शक्ति अनुसार ब्राह्मण को शंख, सोना, फल-फूल, वस्त्र आदि दान करना चाहिए।

सती व्रत फल (Benefits of Sati Vrat in Hindi)

मान्यता के अनुसार सती व्रत का पुण्य फल प्राप्त करके स्त्री गणेश माता "पार्वती" के लोक में जाता है। इसके अलावा वर्षों तक पार्वती जी के साथ समय व्यतीत कर पुनः उत्तम कुल में जन्म लेती है।