माघ पूर्णिमा व्रत विधि- Magh Purnima Vrat Vidhi in Hindi
व्रत विधि

माघ पूर्णिमा व्रत विधि- Magh Purnima Vrat Vidhi in Hindi

Dharm Raftaar

पूर्णिमा का व्रत हर महीने रखा जाता है। इस दिन आकाश में चांद अपने पूर्ण रूप में दिखाई देता हैं। हर पूर्णिमा व्रत की महिमा और विधियां भिन्न होती हैं। माघ पूर्णिमा व्रत कई श्रेष्ठ यज्ञों का फल देने वाला माना जाता है।

माघ पूर्णिमा व्रत  (Magh Purnima Vrat)

वर्ष 2021 में माघ पूर्णिमा व्रत 27 फरवरी को आएगा।

माघ पूर्णिमा व्रत विधि (Magh Purnima Vrat Vidhi in Hindi)

नारद पुराण के अनुसार माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा (Magh Purnima) के दिन व्रती को प्रातः स्नान कर लेना चाहिए। पूजा घर में भगवान शंकर की प्रतिमा को स्थापित कर उनकी धूम, गंध, फल, फूल दीप आदि से विधि पूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजा समाप्त करने के बाद तिल, सूती कपड़े, कम्बल, रत्न, कंचुक, पगड़ी, जूते आदि का शक्ति अनुसार ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

माघ पूर्णिमा अनुष्ठान

माघ पूर्णिमा के दिन, भक्तों को जल्दी उठना चाहिए और सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए। जो लोग नदी में स्नान नहीं ले सकते वे पानी में गंगाजल को मिलाकर घर पर स्नान कर सकते हैं।

इस दिन भक्त भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा करते हैं। साथ ही 'इष्ट देवता' के साथ-साथ  माघ पूर्णिमा का दिन देवी पार्वती और भगवान बृहस्पति की पूजा करने के लिए भी उत्तम है।

भक्त पूरी भक्ति के साथ सत्यनारायणा पूजा करते हैं और सत्यनारायण कथ का पाठ भी करते हैं। भगवान की मूर्ति को केला की पत्तियों चंदन के लेप तिल सुपारी मोली और फलों के साथ पूजा जाता है। भारत में भगवान विष्णु के अधिकांश मंदिरों में इस पूजा के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। इसलिए लोग शाम को मंदिरों में भी जाते हैं।

माघ पूर्णिमा के दिन उपवास फायदेमंद माना जाता है। इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति दिन के दौरान उपवास रखता है और शाम को चंद्रमा को 'अरध्य' देने के बाद ही खाना खाता है। एक दिन में एक बार भोजन करने की अनुमति है।

कपड़े भोजन अनाज घी गुड़ और फलों का इस दिन दान करना बेहद फायदेमंद है। दान किसी भी रूप हो सकता है और इसे ब्राह्मणों और उन लोगों को दिया जाना चाहिए जिन्हें इसकी ज़रुरत है।

माघ पूर्णिमा व्रत फल (Benefits of Magh Purnima Vrat in Hindi)

माघ पूर्णिमा व्रत के दिन पूरे श्रद्धाभाव से भगवान शिव की पूजा करने वाला विष्णु लोक और ब्राह्मण को दान देने वाला स्वर्ग लोक जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत करने वाले पर शिव जी की विशेष कृपा रहती है।