ढुण्ढिराज व्रत विधि - Dhundhiraaj Vrat Vidhi

ढुण्ढिराज व्रत विधि - Dhundhiraaj Vrat Vidhi

फाल्गुन मास की चतुर्थी को ढुण्ढिराज व्रत रखा जाता है। यह व्रत बहुत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीगणेश की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। ढुण्ढिराज व्रत मनुष्य की सुख -सम्पदा को बढ़ाने वाला माना जाता है।

ढुण्ढिराज व्रत विधि (Dhundhiraaj Vrat Vidhi in Hindi)

नारद पुराण के अनुसार ढुण्ढिराज व्रत (Dhundhiraaj Vrat) करने वाले व्रती को विधिपूर्वक श्रद्धाभाव से गणेश पूजन करना चाहिए। इस दिन तिल से बनी हुई चीजों का गणेश भगवान को भोग लगाना चाहिए। इस दिन तिल से ही हवन करना चाहिए तथा ब्राह्मणों को भी तिल का भोजन करवा कर उन्हें तिल दान करना चाहिए।

इस व्रत में व्रती को परिवार सहित प्रसाद रूप में तिल से बने लड्डूओं को ही खाना चाहिए। यदि संभव हो तो ढुण्ढिराज व्रत में सोने की गणेश मूर्ति बनाकर उसकी पूजा कर उसे श्रेष्ठ ब्राह्मण को दान देना चाहिए।

ढुण्ढिराज व्रत फल (Benefits of Dhundhiraaj Vrat in Hindi)

इस प्रकार श्रद्धाभाव से चतुर्थी को गणेश जी की पूजा करने पर प्रसाद रूप में विभिन्न सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इस व्रत की महिमा से व्यक्ति की सम्पदाओं में वृद्धि होती है तथा मंगल फल की प्राप्ति होती है।

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