अशून्य शयन व्रत विधि- Ashunya Shayan Vrat Vidhi in Hindi
व्रत विधि

अशून्य शयन व्रत विधि- Ashunya Shayan Vrat Vidhi in Hindi

Dharm Raftaar

अशून्य शयन व्रत का हिन्दू धर्म में एक विशेष महत्त्व है। भविष्य पुराण के अनुसार अशून्य शयन व्रत (Ashunya shayan Vrat) श्रावण कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। पति-पत्नी के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए इस व्रत को बेहद अहम माना जाता है।
 

क्या करे अशून्य शयन व्रत में (Ashunya shayan vrat vidhi)

भविष्य पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी हमेशा रहती हैं। दोनों ही दैवीय शक्ति को एक आदर्श जोड़ी माना जाता है। इनको आदर्श मान इनकी पूजा करने वाले जातक के दांपत्य जीवन में कभी खटास नहीं आती है।

इस दिन व्रत करना चाहिए। प्रात: काल सभी कार्यों से निवृत्त होकर देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का दूध और शहद से अभिषेक कर विधि-पूर्वक उनकी पूजा करनी चाहिए।
अशून्य शयन व्रत में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की मूर्ति को विशेष शय्या पर स्थापित करना चाहिए। इस दिन व्यक्ति का मौन धारण करना अति शुभ माना जाता है।
 

अशून्य शयन व्रत फल(Benefits of Ashunya shayan vrat in Hindi)

इस व्रत को करने से स्त्री वैधव्य तथा पुरुष विधुर होने के पाप से मुक्त हो जाता है। यह व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला तथा मोक्ष प्रदाता माना जाता है। इस व्रत से गृहस्थ जीवन में शांति बनी रहती है, तथा खुशहाली आती है।