बकरीद क्यों मनाई जाती है, जाने क्या है इसका महत्व और इस दिन क्या होता है

बकरीद क्यों मनाई जाती है, जाने क्या है इसका महत्व और इस दिन क्या होता है

भारतीय उपमहाद्वीप में 'Festival of the sacrifice,' को अरबी में ईद-अल-अधा कहा जाता है और भारतीय उपमहाद्वीप में बकरा-ईद कहा जाता है, क्योंकि उर्दू में बकरी या बकरी की बलि देने की परंपरा है। दो ईद में से यह मुसलमानों की दूसरी ईद होती है जिसे कई परम्पराओं के साथ भारत और दुनियाभर में मनाया जाता है।

पहली ईद अल-फ़ितर या रमज़ान ईद है। यह त्योहार रमजान या रमजान के नौवें महीने के अंत का प्रतीक है जब दुनिया भर में मुसलमान सुबह से शाम तक उपवास करते हैं।

इस्लामी कैलेंडर में बारहवें और अंतिम महीने - बकरीद 'धु अल हिजाह' के दौरान मनाई जाती है। चूंकि त्योहार का सही दिन चांद के दिखने पर आधारित होता है, इसलिए, इस बात की संभावना है कि देशों के बीच तिथि भिन्न हो सकती है। इस साल, त्योहार जुलाई के महीने में मनाया जाएगा।

भारत में बकरीद कब है?

सऊदी अरब द्वारा घोषित तारीख के अनुसार, जश्न शुक्रवार, जुलाई 20, 2021 को पूरी दुनिया में शुरू होगा। लेकिन भारत में, यह अगले दिन मनाया जाएगा।

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम के अनुसार, ईद अल-अधा का त्यौहार 21 जुलाई, 2021 को भारत में चंद्रमा के दिखने पर मनाया जाएगा।

बकरीद मनाने का महत्व -

इस इस्लामिक त्यौहार के पीछे एक ऐतिहासिक तथ्य छिपा हुआ है, हजरत इब्राहीम, जिन्हें अल्लाह का बंदा माना जाता था, जिनकी इबादत पैगम्बर के तौर पर की जाती है। जिन्हें हर एक इस्लामिक द्वारा अल्लाह का दर्जा दिया जाता है, जिन्हें इस औदे से नवाजा गया उनका खुद खुदा ने इम्तहान लिया था।

ऐसा माना जाता है कि हजरत इब्राहिम (अब्राहम) साहब लगातार ऐसे सपने देख रहे थे कि वह अल्लाह की इच्छा के अनुसार अपने बेटे इस्माईल का वध कर रहे हैं। इसलिए, एक दिन, उन्होने अपने बेटे को अपने सपने के बारे में बताया और उनके बेटे ने अपने पिता से खुदा के आदेश का पालन करने का अनुरोध किया। इब्राहिम अपने बेटे की बलि लेने ही जा रहा थे कि आखरी समय में अल्लाह ने एक भेड़ को भेज दिया और कहां की बेटे की बलि चढ़ाने की बजाए जानवर की बलि लो। तब से मुसलमानों द्वारा एक भेड़ या एक बकरी की बलि देने की रस्म निभाई जाती है। इस कारण इस त्यौहार को बकरीद के नाम से भी जाना जाता है।

परंपरागत रूप से, त्यौहार के दौरान, बलिदान किए गए मांस को तीन समान भागों में विभाजित किया जाता है - पकाया हुआ मांस का एक हिस्सा परिवार के सदस्यों के लिए रखा जाता है, दूसरा रिश्तेदारों को जाता है और बाकी गरीबों और जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है।

हालांकि, इस साल, चल रही महामारी के कारण, उत्सव हर बार की तरह भव्य नहीं होगा। मुसलमान सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए अपने घरों पर बकरीद मनाएंगे।

बकरीद पर भेजें ये प्यारे संदेश –

जिंदगी का हर पल खुशियों से कम न हो,

आप का हर दिन ईद के दिन से कम न हो,

ऐसा ईद का दिन आपको हमेशा नसीब हो,

जिसमे कोई दुःख और गम न हो

आपको और आपके परिवार को ईद मुबारक

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कोई इतना चाहे तुम्हें तो बताना,

कोई तुम्हारे इतने नाज उठाए तो बताना,

ईद मुबारक तो हर कोई कह देगा तुमसे,

कोई हमारी तरह कहे तो बताना।

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समुद्र को उसका किनारा मुबारक

चांद को सितारा मुबारक

फूलों को उसकी खुशबू मुबारक

दिल को उसका दिलदार मुबारक

आपको और आपके परिवार

को ईद का त्यौहार मुबारक

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