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अंधविश्वास के सभी रूपों की अस्वीकृतिRejection Of All form of Blind Rituals

अंधविश्वास के सभी रूपों की अस्वीकृति (Rejection Of All form of Blind Rituals)

सभी अंधे अनुष्ठान या अंधविश्वासों जैसे कि उपवास, धार्मिक शाकाहार, तीर्थ यात्रा, अंधविश्वास, योगा, मूर्ति पूजन आदि की सिख धर्म में अस्वीकृति है। सिख धर्म में किसी प्रकार का हवन या अनुष्ठान आदि नहीं किया जाता है। इस धर्म में कई जगह उपवास की भी मनाही है। 

गुरु नानक जी के विचार (Thoughts of Guru Nanak Ji)

गुरु नानक जी के अनुसार उपवास से अपना अच्छा आचरण बनाओ। “वर सुही” में वह कहते हैं कि वह धार्मिक स्थलों पर स्नान लेने जाते हैं, उनके दिमाग अशुद्ध हैं और उनके शरीर चोरों की तरह हैं। यदि स्नान लेने से उनकी गंदगी थोड़ी कम भी हो जाती है तो वह बाद में उससे भी दुगुनी गंदगी और अहंकार अपने अंदर बढ़ा लेते हैं।

भगत कबीर के विचार (Thoughts of Bhagat Kabir)

भगत कबीर कहते हैं कि "तुम अपने अल्लाह को खुश करने के लिए रोज़ा रखते हो लेकिन अपने स्वाद के लिए किसी के जीवन को खत्म कर देते हो। आप प्रभु को प्रतिबिंबित नहीं करते, आपके भीतर कौन है।" 

गुरु अमर दास का इस विषय में कहना  था कि दुनिया अपने अहंकार की गंदगी के कारण पीड़ा में है। शबद द्वैत के कारण मैला है। यदि कोई व्यक्ति सौ धार्मिक स्थलों पर भी स्नान कर ले तब भी उसके अहंकार की गंदगी मिट नहीं सकती।" 

इसी तरह अन्य कई धर्म गुरुओं ने अपने जीवन काल में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को दूर रखने का प्रयास किया। सिख धर्म सिर्फ गुरु की वाणी पर यकीन करता है।

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सिख धर्म के प्रमुख तत्व