नर्म मार्ग

सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक तत्वों में से एक है नर्म मार्ग। दरअसल नर्म मार्ग प्रतिदिन ईश्वर का स्मरण करने पर ज़ोर देता है। सिख धर्म के अनुसार जिस तरह हम प्रतिदिन खाना खाते हैं, सांस लेते हैं उसी तरह प्रतिदिन अपने गुरु या ईश्वर का स्मरण करना भी जरूरी है। 

नर्म मार्ग के विषय में गुरु नानक जी के कथन  (Guru Nanak Ji words in Gauri Sukhmani)

गौरी सुखमनी (धार्मिक पुस्तक) में नर्म मार्ग के महत्व पर गुरु नानक जी का कथन है कि, "प्रभु का ध्यान करना सबसे महान कार्य है जिसके द्वारा अनगिनत लोग रिहाई या मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। भगवान का ध्यान कर भटके हुए मनुष्य अपनी प्यास और इच्छाओं को बुझा सकते हैं। ईश्वर की राह पर चलकर हम अंतर्यामी बन सकते हैं और अज्ञानता का अंधेरा दूर हो सकता है। इसके माध्यम से हमारे मन से मौत का भय दूर हो सकता है और हमारे सारे पाप धूल सकते हैं। जिस मन में सदा भगवान का वास हो उस मन से गंदगी भी दूर हो जाती है। ऐसा मन स्वच्छ हो अपनी सभी इच्छाएं पूर्ण कर सकता है। 

नर्म मार्ग की सीख (Importance of Narm Marg in Hindi)

सिख धर्म के अनुसार नर्म मार्ग और सदैव भगवान का नाम लेने वाला जातक कभी गलत काम नहीं करता। जो मन प्रतिदिन ईश्वर का ध्यान करे उसके मन में बुराइयां पैदा ही नहीं हो सकती है। जो गलत काम नहीं करता वह अवश्य ही एक उज्ज्वल भविष्य की तरफ अग्रसर रहता है। इसलिए प्रतिदिन ईश्वर का ध्यान करना जरूरी है। 

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