कृपाण

कृपाण (Kirpan - Sacred Sword in Hindi)

एक सिख को जिन जिन पांच चीजों को अनिवार्य रूप से धारण करना चाहिए उनमें से सबसे अहम है कृपाण। वीरता और साहस की निशानी समझे जाने वाले कृपाण को सिख अकसर कमर पर लटकाकर या फिर बैग आदि में रखते हैं। आजकल के दौर में कृपाण की जगह छोटे-छोटे चाकू रखने का रिवाज है।  

कृपाण का महत्व (Importance of Kripan in Hindi)

कृपाण दो शब्दों से बना है "कृपा" और "आन"। सिख धर्मानुसार एक सिख के अंदर संत और सिपाही दोनों के गुण होने चाहिए। गुरु गोविन्द सिंह जी ने जिस खालसा पंथ की स्थापना की थी उसका एक अंग लड़ाका भी था जिसका काम जनता पर हो रहे अत्याचार को रोकना था। ऐसे में कृपाण उनकी रक्षा के लिए बेहद विशेष अस्त्र माना गया। सिख धर्म में कृपाण वीरता दिखाने और आत्मरक्षा के लिए रखा जाता है। यह सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण अस्त्र होता है। कृपाण एक सिख को अपने आसपास होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और उसके लड़ने का जज्बा प्रदान करता है।

कृपाण रखने की प्रथा (Tradition of Sword Placing in Hindi)

सिख धर्म में कृपाण या तलवार रखने की शुरुआत छठे सिख गुरु हरगोबिन्द सिंह ने शुरु की थी। गुरु हरगोबिन्द सिंह जी ने ही सिख समुदाय में संत-सिपाही की धारणा शुरु की। गुरु हरगोबिन्द सिंह जी के अनुसार एक सिख को हमेशा ईश्वर के ध्यान में लीन रहना चाहिए। साथ ही एक सिख को समाज या अपने आसपास हो रहे अधर्म के खिलाफ आवाज उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके बाद गुरु गोबिन्द सिंह जी ने सिखों के लिए कृपाण रखना अनिवार्य कर दिया।

कृपाण ही क्यों ? ( Why only Sword in Hindi)

कई लोग सोचते हैं कि अगर गुरु गोबिन्द सिंह जी सिखों के लिए एक अस्त्र रखना अनिवार्य करना चाहते थे तो उन्होंने बंदूक या किसी अन्य अस्त्र को क्यों नहीं चुना? जबकि बंदूक गुरु गोबिन्द सिंह जी के समय में सुलभता से हासिल हो जाते थे। इसके पीछे वजह यह है कि कृपाण या तलवार हमारी सभ्यता और संस्कृति से जुड़े हैं।

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सिख धर्म के प्रमुख तत्व

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