गुरूवाणी

गुरूवाणी यानि गुरु की वाणी एक सिख शब्दावली है। गुरु द्वारा दिए गए उपदेशों को गुरुवाणी कहा जाता है जिन्हें गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित किया गया है। समय के अनुकूल गुरु जी ने जोगियों, पंडितों तथा अन्य संतों के सुधार के लिए बेअंत वाणी की रचना की। गुरुवाणी शुद्ध और सात्विक जीवन जीने की दिशा तथा सिद्धांत देती है। गुरुवाणी के उपदेश विश्व-व्यापी और अनन्त हैं।

गुरूवाणी का महत्त्व (Importance of Gurbani in Hindi)

गुरुवाणी प्रभु और आत्मा के गुणों का व्याख्यान है जिसे एक सिख को समझना चाहिए ताकि वह अपने गुरु के सामने अपार दर्जा प्राप्त कर सके। जो व्यक्ति गुरुवाणी में सम्मिलित हो जाता है उसे अमृतधारी कहा जाता है। गुरुवाणी का एक सरल संदेश है कि सभी एक और सर्वव्यापी हकीकत है।

आदिग्रंथ में बखान (Addressed in Adi Granth in Hindi)

आदिग्रंथ के मुताबिक गुरुवाणी वह ध्वनि है जो सीधे परमात्मा से आई है और उसका पाठ सांसारिक भाषा और लिपियों में उसी प्रकार लिखा गया है। यह आध्यात्मिक ज्ञान का एक स्रोत है जो एक व्यक्ति की बुद्धि और विचारों को स्पष्ट करता है और उसके मन को आंतरिक आनंद पहुंचाता है।

पांच चिन्ह

KaraKirpanKangha

सिख धर्म के प्रमुख तत्व

Narm MargGurbaniFamily
लोकप्रिय फोटो गैलरी