सिख धर्म की विशेषताएं

भगवान मानव रूप नहीं ले सकते

सिख धर्म का अवतारवाद में विश्वास नहीं है। सिख धर्म इस बात का पुरजोर विरोध करता है कि भगवान अवतार लेते हैं या भगवान के कई रूप होते हैं। सिख धर्म की मान्यता है कि भगवान ना तो जीवन लेते हैं और ना मृत्यु को प्राप्त होते हैं। वह एक ...

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नर्म मार्ग

सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक तत्वों में से एक है नर्म मार्ग। दरअसल नर्म मार्ग प्रतिदिन ईश्वर का स्मरण करने पर ज़ोर देता है। सिख धर्म के अनुसार जिस तरह हम प्रतिदिन खाना खाते हैं, सांस लेते हैं उसी तरह प्रतिदिन अपने गुरु या ईश्वर क...

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सामान्य गृहस्थ जीवन

सिख धर्म के प्रमुख तत्वों में से एक है सामान्य गृहस्थ जीवन को बढ़ावा देना। चूंकि सिख समाज अंधविश्वासों और संत आदि से दूर रहता है इसलिए इस धर्म में संन्यासी जीवन को प्रधानता नहीं दी जाती है।

कर्म के साथ मोक्ष की...

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केश

लंबे केश रखना सिख धर्म में अनिवार्य माना गया है। यह एक सिख को गुरु की तरह बर्ताव करने की याद दिलाता है। लंबे बाल रखने के पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक पहलू भी हैं। लंबे बाल जहां एक तरफ सिख समुदाय को भीड़ से अलग पहचान दिलाते हैं व...

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कड़ा

कड़ा (Kara - Steel Bracelet in Hindi)

सिख पंच ककारों में से एक कड़े को बेहद महत्वपूर्ण समझा जाता है। कड़ा स्टील से बना हाथ में पहनने वाली एक वस्तु होती है। इसे अमूमन बाएं यानि सीधे हाथ में पहना जाता है। सि...

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कृपाण

कृपाण (Kirpan - Sacred Sword in Hindi)

एक सिख को जिन जिन पांच चीजों को अनिवार्य रूप से धारण करना चाहिए उनमें से सबसे अहम है कृपाण। वीरता और साहस की निशानी समझे जाने वाले कृपाण को सिख अकसर कमर पर लटकाकर ...

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ईश्वर एक है

"एक ओंकार सतनाम" यह मात्र एक शब्द या मंत्र नहीं बल्कि सिख धर्म की मूल धारणा है। सिख धर्म विश्व के कई प्रमुख धर्मों की तरह एकेश्वर में यकीन करता है। सिख धर्म का मानना है कि ईश्वर अकाल और निरंकार है। सिख धर्म के सबसे पा...

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मानव जीवन का लक्ष्य

मानव जीवन का लक्ष्य जन्म और मृत्यु के चक्र को तोड़कर भगवान के साथ विलय हो जाना है। इस लक्ष्य को गुरु की शिक्षाओं का पालन करके, पवित्र नाम पर ध्यान करके और सेवा दान करके ही प्राप्त किया जा सकता है।

जीवन में धर्...

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पंज दोष

हर धर्म में कुछ वर्जित कार्यों का वर्णन किया गया है, इन कामों के कारण मनुष्य अपनी मंजिल तक पहुंचने में असमर्थ हो जाता है। सिख में ऐसे वर्जित कार्यों को पंज दोष कहते हैं।  सिख धर्म में पांच "पंज द...

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अंधविश्वास के सभी रूपों की अस्वीकृति

सभी अंधे अनुष्ठान या अंधविश्वासों जैसे कि उपवास, धार्मिक शाकाहार, तीर्थ यात्रा, अंधविश्वास, योगा, मूर्ति पूजन आदि की सिख धर्म में अस्वीकृति है। सिख धर्म में किसी प्रकार का हवन या अनुष्ठान आदि नहीं किया जाता है। इस धर्म में कई ज...

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गुरूवाणी

गुरूवाणी यानि गुरु की वाणी एक सिख शब्दावली है। गुरु द्वारा दिए गए उपदेशों को गुरुवाणी कहा जाता है जिन्हें गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित किया गया है। समय के अनुकूल गुरु जी ने जोगियों, पंडितों तथा अन्य संतों के सुधार के लिए बेअंत व...

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कंघा

कंघा (Comb in Sikhism) : सिख धर्म के अनुसार हर खालसा या सिख अपनाने वाले जातक को लकड़ी का बना कंघा अवश्य रखना चाहिए। यह पंच ककारों में से एक माना जाता है।

पारंपरिक धार्मिक मान्यता (Traditional Rel...

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कच्छा

सिख धर्म के पंच ककारों में कच्छ महत्वपूर्ण माना जाता है। कच्छे को महत्वपूर्ण अंग छुपाने, काम वासना पर कंट्रोल पाने और स्वच्छता के लिए अनिवार्य माना जाता है। साथ ही कच्छा एक ऐसा परिधान है जिसे पहनकर मनुष्य बेहद आरामदायक महसूस कर...

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सिख धर्म के प्रमुख तत्व

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