दसम ग्रंथ

दसम ग्रंथ को सिख धर्म के “दसवें बादशाह का ग्रंथ” कहकर भी पुकारते हैं। इस ग्रंथ में सिखों के दसवें गुरू गोबिन्द सिंह जी के शब्दों (गुरु वचनों) को संग्रहित किया गया है। गुरू गोबिन्द सिंह जी के शब्दों को गुरू ग्रंथ साहिब में संकलित ना करके अलग से इस ग्रंथ में संकलित किया गया है। वीर रस से भरी इस पुस्तक को खालसा पंथ के विषय में जानकारी पाने का सर्वोत्तम स्त्रोत माना जाता है।

दसम ग्रंथ की सिख धर्म में भूमिका (Role of Dasam Granth in Sikhism)

जाप साहिब, बेन्ती चौपाई जैसी दसम ग्रंथ की रचनाएं सिखों के नितनेम यानी उनकी रोजाना की प्रार्थनाओं में शामिल हैं। रोजाना होने वाले अरदास का शुरूआती भाग भी दसम ग्रंथ के भीतर की ही एक रचना है। इस ग्रंथ में खालसा पंथ की रचना की भूमिका भी शामिल है। यह पुस्तक खालसा पंथ की विशेषताओं का वर्णन करती है।

कैसे शुरू हुआ दसम ग्रंथ का संकलन (History of Dasam Granth)

कहा जाता है कि भाई मनी सिंह जो कि दसवें गुरू के साथी और शिष्य भी थे, ने दूसरे खालसा भाईयों की मदद से गुरू के शब्दों को दसम ग्रंथ में संग्रहित किया। यह शब्द या गुरु वचन पुस्तिकाओं, लेख और प्रार्थनाओं के रूप में लोगों के बीच में मौजूद थीं। इस ग्रंथ को संकलित करने में भाई मनी सिंह को लगभग नौ वर्ष लग गए थे।

दसम ग्रंथ के पाठ (Chapters in Dasam Granth)

दसम ग्रंथ में कुल 1428 पृष्ठ हैं और इसमें गुरू गोबिन्द सिंह जी के शब्द, जाप साहिब, अकाल उस्तत, विचित्र नाटक, चंडी चरित्र के दो पाठ, ब्रह्म अवतार, रूद्र अवतार, चंडी का वार, ज्ञान परबोध, चौबीस अवतार, शब्द हजारे, खालसा महिमा, शस्तर नाम माला, ज़फरनामा, हिकारत आदि के पाठ हैं।

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