श्री नमिनाथ जी

भगवान श्री नमिनाथ का जीवन परिचय (Details of Jain Tirthankar Naminath Ji)

जैन धर्म के इक्कीसवें तीर्थंकर भगवान श्री नमिनाथ जी का जन्म मिथिला के इक्ष्वाकुवंश में श्रावण कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को अश्विनी नक्षत्र में हुआ था। इनके माता का नाम विप्रा रानी देवी और पिता का नाम राजा विजय था। इनके शरीर का वर्ण सुवर्ण था जबकि इनका चिह्न नीलकमल था।

इनके यक्ष का नाम भृकुटी और यक्षिणी का नाम गांधारी देवी था। जैन धर्मावलम्बियों के अनुसार भगवान श्री नमिनाथ जी के गणधरों की कुल संख्या 17 थी, जिनमें शुभ स्वामी इनके प्रथम गणधर थे। इनके प्रथम आर्य का नाम अनिला था।

मोक्ष की प्राप्ति

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्री नमिनाथ जी ने मिथिला में दीक्षा की प्राप्ति की थी और दीक्षा प्राप्ति के पश्चात 2 दिन के बाद खीर से इन्होंने प्रथम पारण किया था। दीक्षा प्राप्ति के पश्चात् 9 महीने तक कठोर तप करने के बाद भगवान श्री नमिनाथ को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मिथिला में ही बकुल वृक्ष के नीचे कैवल्यज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

भगवान श्री नमिनाथ वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को सम्मेद शिखर पर 536 साधुओं के साथ निर्वाण को प्राप्त किया था।

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