हाजी अली दरगाह

हाजी अली दरगाह महाराष्ट्र राज्य के मुंबई शहर में स्थित है। यह मुस्लिम और हिन्दू दोनों धर्मों के साथ-साथ अन्य धर्म के लोगों के लिए भी धार्मिक रूप से बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इस दरगाह में सूफी संत सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की कब्र स्थित है। इसे मुंबई की सीमा भी माना जाता है। इस दरगाह की स्थापना से जुड़ी एक चर्चित कथा निम्न है।  

हाजी अली दरगाह से जुड़ी एक कथा (Story of Haji Ali Dargah in Hindi)

एक कथा के अनुसार उज़्बेकिस्तान के बुखारा प्रांत में हाजी अली नाम का व्यक्ति रहता था। वह बहुत ही धनी और व्यापारी परिवार में जन्मे थे। एक बार की बात है, हाजी अली भ्रमण करने के लिए निकले। वह भ्रमण करते हुए भारत पहुंचे तथा मुंबई जा कर बस गए।  

कुछ दिन बीत जाने के बाद वहां हाजी अली का भाई आया और उसने उन्हें घर लौटने को कहा परंतु हाजी अली नहीं लौटे। उन्होंने भाई के हाथों अपनी माता के लिए एक पत्र भेजा। पत्र में लिखा था "मैं अब ना लौटूंगा यहीं रहकर इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करूंगा।" 

इसके बाद पीर हाजी अली बुखारी (Peer Haji Ali Bukhari) ने मुंबई में रहकर लोगों को इस्लाम की शिक्षा दी। कुछ समय के बाद जब उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा तो उन्होंने अपने अनुयायियों को बुलाया और कहा कि मृत्यु के बाद मेरे शव को किसी कब्रिस्तान में दफनाने की जगह उसे समुद्र में बहा देना और जिस जगह लोगों को उनका ताबूत मिले उसे वहीं दफना दिया जाए।

हाजी अली (Haji Ali) के अनुयायियों ने उनकी इस बात को माना और उनकी मृत्यु के बाद उनके शव को ताबूत में बंद कर समुद्र में बहा दिया। यह एक चमत्कार है कि वह ताबूत नह्कार वापस मुंबई की तरफ आ गया और समुद्र में उठी चट्टानों के एक छोटे से टीले पर रुक गया। इसके बाद हाजी अली के अनुयायियों ने उस स्थान पर हाजी अली का दरगाह बना दिया। कई लोग यह भी मानते हैं कि संत हाजी अली की समुद्र में डूब जाने से मृत्यु हो गई थी और उसी जगह उनके अनुयायियों ने इस खूबसूरत दरगाह (Haji Ali Dargah) का निर्माण कर दिया।

हाजी अली दरगाह की विशेषता (Importance of Hali Ali Dargah in Hindi)

लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति हाजी अली की दरगाह पर जाकर सच्चे मन से प्रार्थना करता है तो उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। यहां अपनी मुरादें पूरी होने पर श्रद्धालु आस्था से दोबारा दर्शन के लिए अवश्य आते हैं। 

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