तक़दीर

इस्लाम धर्म की यह मान्यता है कि एक मुसलमान इंसान की तकदीर उसके अल्लाह द्वारा तय कर दी गई है। केवल अल्लाह ही को जानकारी है कि एक शख्स की तकदीर में क्या लिखा है? किसी की सिफारिश उसकी तकदीर को नहीं बदल सकती।

तकदीर का लेखा (Accounts of destiny)

यदि इन्सान अच्छे कर्म करता रहेगा और केवल अल्लाह ही से मांगेगा तो वह अपनी तकदीर बदलवा भी सकता है। इस्लाम में यक़ीन करने वाले छह लेखों में से एक लेख तकदीर पर यकीन करना है। तकदीर पर ईमान लाना असल में अल्लाह की शहादत देना भी होता है।

“तकदीर अल्लाह के द्वारा तय की जा चुकी है” इसका मतलब यह नहीं है कि इस बात का बहाना उठाकर कोई शख्स बुराई पर कायम रहे बल्कि यहां तकदीर का अर्थ है कि जो कुछ होने वाला है उसे अल्लाह बेहतर जानता है।

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