कयामत

इस्लाम धर्म में जिस तरह अल्लाह, रसूल, कुरआन पर भरोसा किया जाता है उसी तरह आख़िरत के दिन पर यानि कयामत पर भी भरोसा किया जाता है। कुरआन के अनुसार भी कयामत का दिन निश्चित है और इस दिन दुनिया खत्म हो जाएगी।

क्या है कयामत की कहानी? (What is the story of doom?)

कुरान के अनुसार कयामत के दिन वह मुर्दों में भी जान फूंक देंगे और तब हश्र के मैदान में उनसे उनका हिसाब किताब किया जाएगा। कयामत के दिन ना बाप-बेटे का होगा ना भाई-बहन का। इस दुनिया की कीमती से कीमती चीज़ और ना ही किसी की सिफारिश तब किसी इन्सान के काम आएगी। केवल अच्छे आमालों और इस्लाम के स्तंभों और सुन्नत तरीकों से जिंदगी गुजारने वाले इंसानों को ही जन्नत में भेजा जाएगा।

कयामत की निशानी (A sign of the Apocalypse)

कुरआन में कयामत की जो निशानियां बताई गई हैं उनमें से कुछ हैं दज्जाल का प्रकट होना, पाप बढ़ जाएंगे, अधिकाधिक भूकंप आएंगे, नमाज़ों के लिए इमाम नहीं मिलेंगे, औरतों की तादाद में मर्द ज्यादा होंगे, मेंहदी मुसलमानों के इमाम बनकर उभरेंगे आदि।

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