धार्मिक मत - इस्लाम

ईश्वर की एकता

मुसलमान एक ही ईश्वर को मानते हैं, जिसे वो अल्लाह (फ़ारसी: ख़ुदा) कहते हैं। एकेश्वरवाद को अरबी में तौहीद कहते हैं, जो शब्द वाहिद से आता है जिसका अर्थ है एक। इस्लाम में इश्वर को मानव की समझ से ऊपर समझा जाता है। इस्लाम के पांच स्त...

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नबी और रसूल

अल्लाह ने जब मनुष्य को बनाया तो उसने उन तक अपना पैगाम पहुंचाने के लिए रसूलों को इस धरती पर उतारा। अल्लाह ने अपनी चार आसमानी किताबें (तौरेत, जब्बूर, इंजील और कुरआन) भी धरती पर रसूलों के द्वारा ही उतारीं। अल्लाह ने रसूलों को इस उ...

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कयामत

इस्लाम धर्म में जिस तरह अल्लाह, रसूल, कुरआन पर भरोसा किया जाता है उसी तरह आख़िरत के दिन पर यानि कयामत पर भी भरोसा किया जाता है। कुरआन के अनुसार भी कयामत का दिन निश्चित है और इस दिन दुनिया खत्म हो जाएगी।

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तक़दीर

इस्लाम धर्म की यह मान्यता है कि एक मुसलमान इंसान की तकदीर उसके अल्लाह द्वारा तय कर दी गई है। केवल अल्लाह ही को जानकारी है कि एक शख्स की तकदीर में क्या लिखा है? किसी की सिफारिश उसकी तकदीर को नहीं बदल सकती।

तकदीर ...

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फरिश्ते

इस्लामिक धर्म के मुताबिक फरिश्तों को अल्लाह ने मनुष्यों से भी पहले बनाया था। हमारी ही तरह फरिश्ते भी अल्लाह ही के आगे झुकते हैं और हर वक्त उन्हीं के नाम का कलमा पढ़ते हैं। फरिश्ते अल्लाह का संदेश लेकर आते हैं। वह इस दुनिया में ...

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इस्लाम के पांच स्तंभ

इस्लाम धर्म पांच मूलभूत सिद्धान्त होते हैं जिन्हें इस्लाम के पांच स्तंभ भी कहा जाता है। हर मुस्लिम को इन सिद्धांतों या स्तंभों के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करना होता है। मुस्लिम धर्म की नींव इन्हीं सिद्धान्तों पर ईमान लाकर यानि इ...

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धर्म पुस्तकें

अल्लाह ने अपने बंदों पर मार्गदर्शन के लिए रसूलों द्वारा चार किताबें धरती पर उतारीं। क़ुरान के अतिरिक्त इस्लाम धर्म में जिन अन्य किताबों को बेहद अहम स्थान दिया गया है वह निम्न हैं:

सूहफ ए इब्राहिम
तौरात (तोराह)
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क़ुरान की नसीहतें

* नाहक किसी मासूम के कत्ल को अल्लाह ने हराम किया है।
* जो अल्लाह के साथ दूसरे परवरदिगार को नहीं पुकारते, गुनाह से दोचार होंगे।
* आकाश और धरती के रहस्यों का सम्बन्ध अल्लाह से ही है!
* जो आख़िरी दिन पर ईमान नहीं...

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