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वट सावित्री व्रत विधिVat Savitri Vrat Vidhi

वट सावित्री व्रत विधि (Vat Savitri Vrat Vidhi)

हिन्दू धर्म में वट सावित्री व्रत को करवा चौथ के समान ही माना जाता है। स्कन्द व भविष्य पुराण के अनुसार वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को किया जाता है, लेकिन निर्णयामृतादि के अनुसार यह व्रत ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को करने का विधान है। भारत में वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) अमावस्या को रखा जाता है। इस व्रत को संपन्न कर सावित्री ने यमराज को हरा कर अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे।

वट सावित्री व्रत 2017 (Vat Savitri Vrat 2017)

वर्ष 2017 में वत सावित्री व्रत 25 मई को रखा जाएगा।

वट सावित्री व्रत विधि (Vat Savitri Vrat Vidhi in Hindi)

वट सावित्री व्रत के दिन दैनिक कार्य कर घर को गंगाजल से पवित्र करना चाहिए। इसके बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्माजी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। ब्रह्माजी के बाईं ओर सावित्री तथा दूसरी ओर सत्यवान की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए।

इसके बाद टोकरी को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर रख देना चाहिए। इसके पश्चात सावित्री व सत्यवान का पूजन कर, वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पण करना चाहिए। पूजन के समय जल, मौली, रोली, सूत, धूप, चने का इस्तेमाल करना चाहिए। सूत के धागे को वट वृक्ष पर लपेटकर तीन बार परिक्रमा कर सावित्री व सत्यवान की कथा सुने।

पूजन समाप्त होने के बाद वस्त्र, फल आदि का बांस के पत्तों में रखकर दान करना चाहिए और चने का प्रसाद बांटना चाहिए।

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हिन्दू व्रत विधियां 2017
Vrat Vidhi 2017