उमामहेश्र्वर व्रत

भाद्रपद मास की पूर्णिमा को उमामहेश्र्वर नामक व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। इसे श्रेष्ठ व्रतों में से एक माना जाता है। इसी दिन शक्र नामक व्रत भी किया जाता है।

2016 में उमामहेश्र्वर व्रत तिथि (Uma Maheshwar Vrat Date)

वर्ष 2016 में उमामहेश्र्वर व्रत 15 सितंबर को रखा जाएगा।

उमामहेश्र्वर व्रत विधि (Uma Maheshwar Vrat Vidhi in Hindi)

नारद पुराण के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा के एक दिन पूर्व एक समय भोजन करना चाहिए। इसके बाद रात को सोते समय शिव और पार्वती की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़कर उमामहेश्र्वर व्रत रखने का संकल्प लेकर उसी स्थान पर सोना चाहिए। पूर्णिमा की शाम के समय भगवान शिव की वंदना कर भस्म और रुद्राक्ष आदि ग्रहण करना चाहिए।

विधि पूर्वक भगवान शंकर की पूजा कर उपवास रखना चाहिए। चंद्र उदय होने पर शिव जी की पूजा और जागरण करना चाहिए। 15 वर्षों तक ऐसे ही व्रत का पालन करते हुए अंत में 15 ब्राह्मणों को विभिन्न पकवान खिला कर उन्हें सोना, चांदी, मिट्टी या तांबे का कलश दान करना चाहिए।

शक्र व्रत विधि (Shakra Vrat Vidhi)

नारद पुराण के अनुसार इस दिन शक्र व्रत भी किया जाता है। शक्र व्रत रखने वाले व्रती को प्रातः उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इस दिन विधिपूर्वक गंध आदि से देव राज इंद्र की पूजा करनी चाहिए। इसके पश्चात ब्राह्मणों तथा गरीबों को भी भोजन खिलाकर दान करना चाहिए।

उमामहेश्र्वर व्रत फल (Benefits of Shakra Vrat)

मान्यता है कि उमामहेश्र्वर व्रत का श्रद्धापूर्ण पालन करने वाला व्रती इस पृथ्वी पर विख्यात हो जाता है। इस व्रत की महिमा से व्यक्ति सम्पत्तियों का निधि बन जाता है। शक्र व्रत की महिमा से व्यक्ति को जीवन में कभी धन -धान्य की कमी नहीं होती है।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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