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सूर्यषष्ठी व्रतSurya sasthi

सूर्यषष्ठी व्रत (Surya sasthi)

सूर्यषष्ठी व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को रखा जाता है। इस दिन विशेष रूप से सूर्य देव की पूजा की जाती है। भविष्यपुराण के अनुसार यह व्रत भगवान सूर्य को अति प्रिय है, इसलिए इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से वे जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण भाद्रपद मास की षष्ठी तिथि मानी जाती है।

सूर्यषष्ठी व्रत विधि (Surya sasthi Vrat Vidhi in Hindi)

सूर्यषष्ठी व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस व्रत का आरंभ मार्गशीर्ष महीने की कृष्ण पक्ष की छठी से ही करना चाहिए। इस व्रत में व्यक्ति को शांत और अपनी इंद्रियों पर काबू कर के रहना चाहिए।

व्रत में केवल एक समय (रात्रि) कम और शुद्ध भोजन ही करना चाहिए। विभिन्न माह में विभिन्न नामों से सूर्य की पूजा करनी चाहिए। इस दिन रात में यदि संभव हो तो गौ मूत्र का पान करे तथा भूमि पर ही सोये।
 
वर्ष के अंतिम सूर्यषष्ठी व्रत पर पूजा समाप्ति के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए तथा शक्ति अनुसार वस्त्र, धन, काली गाय और स्वर्ण वस्तु आदि का दान करना चाहिए।
 

मासिक सूर्यषष्ठी व्रत विशेषता (character of Monthly Surya sasthi Vrat in Hindi)
 
मार्गशीर्ष मास : इस माह में व्यक्ति को भगवान सूर्य की "अशुमान" नाम से पूजा करनी चाहिए। सूर्यषष्ठी के दिन रात्रि में केवल गौमूत्र का पान करना चाहिए।
पौष मास : इस महीने में भगवान सूर्य की पूजा "सहस्त्रांशु" नाम से करनी चाहिए। सूर्यषष्ठी के दिन गाय के घी से बनी वस्तु ही खाना चाहिए।
माघ मास : माघ माह की षष्ठी को भगवान सूर्य की पूजा "दिवाकर" नाम से करना चाहिए। इस दिन गाय का दूध रात में पीकर धरती पर ही सोना चाहिए।
फाल्गुन मास : इस माह की षष्ठी को सूर्य देव की आराधना "मार्तण्ड" नाम से करनी चाहिए तथा रात्रि के समय गाय का दूध पीना चाहिए।
चैत्र मास : चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की छठे दिन सूर्य की पूजा "विवास्वान्" नाम से करना चाहिए। इस दिन हविष्य भोजन करना चाहिए।
बैसाख मास : इस माह की सूर्यषष्ठी को "चण्डकिरण" नाम से सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन व्रती को केवल जल पीकर ही उपवास रखना पड़ता है।
ज्येष्ठ मास : इस महीने के सूर्यषष्ठी को भगवान सूर्य की पूजा दिवस्पति नाम से करनी चाहिए तथा गौमूत्र का पान करना चाहिए।
आषाढ़ मास : इस माह की षष्ठी को सूर्य देव की पूजा "अर्क" नाम से करनी चाहिए तथा गाय के दूध से बने भोजन को खाना चाहिए।
श्रवण मास : इस माह की षष्ठी को सूर्य देव की पूजा "अर्यमा" नाम से करना चाहिए तथा रात्रि में केवल गाय का दूध ही पीना चाहिए।
भाद्रपद मास : भाद्रपद मास की सूर्यषष्ठी को भगवान सूर्य की पूजा "भास्कर" नाम से करना चाहिए तथा पंच्चगव्य वस्तुओं को खाना चाहिए।
आश्र्विन मास : इस माह की षष्ठी को भगवान सूर्य की पूजा "भग" नाम से करना चाहिए तथा रात्रि को सोते समय गौमूत्र पीना चाहिए।
कार्तिक मास : कार्तिक मास की सूर्यषष्ठी को सूर्य देव की पूजा "शक्र" नाम से करनी चाहिए तथा भोजन में दूर्वा डालकर एक समय अवश्य खाना चाहिए।
 
 

सूर्यषष्ठी व्रत फल (Benefits of Surya sasthi Vrat in Hindi)
 
भविष्यपुराण के अनुसार इस प्रकार बारह महीने की सूर्यषष्ठी व्रत करने से व्रती के सभी पापों का नाश हो जाता है। सूर्यषष्ठी को विधिपूर्वक सूर्य की पूजा करने से विभिन्न शुभ फल प्राप्त होते हैं तथा कई यज्ञों का पुण्य मिलता है। इसके अलावा इस व्रत के फल से व्यक्ति जीवन के सभी सुखों को भोग कर अंत में सूर्यलोक जाता है।

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