gototop
raftaarLogoraftaarLogoM
Search
Menu
BG
close button


RaftaarLogo
sasas
Print PageSave as PDFSave as Image

सौरि व्रतSouri Pratipada Vrat

सौरि व्रत (Souri  Pratipada Vrat)

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सौरि व्रत रखा जाता है। नारद पुराण के अनुसार इस दिन ही ब्रह्माजी ने सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की थी। इसलिए अमावस्या के बाद जो प्रतिपदा तिथि प्राप्त होती है, उस दिन किए गए व्रत को सौरि व्रत कहते हैं। इस दिन भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती है।

2016 में चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि (Chaitra Maas Pratipada in Hindi)

वर्ष 2016 में अप्रैल माह की 08 तारीख अर्थात अमावस्या के एक दिन बाद सौरि व्रत रखा जाएगा।

सौरि व्रत विधि (Souri Vrat Vidhi in Hindi)

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को प्रातः स्नान कर अग्निरुपधारी भगवान ब्रह्मा की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद विभिन्न देवताओं की अलग -अलग पूजा करनी चाहिए। इस प्रकार पूजा के साथ ऊँकारपूर्वक नमस्कार करना चाहिए। व्रत पूर्ति के लिए कुश, जल, अक्षत के साथ सोना और वस्त्र दक्षिणा के साथ ब्राह्मण को दान देना चाहिए।

सौरि व्रत फल (Benefits of Souri Vrat in Hindi)

सौरि व्रत को बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है। इस व्रत की महिमा से व्रती के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं तथा उसे सुख और शान्ति प्राप्त होती है। इसके अलावा इस व्रत को करने से व्यक्ति को दीर्घ आयु, धन, सौभाग्य के साथ- साथ इहलोक और परलोक के सभी सुख प्राप्त होते हैं।

Raftaar.in

हिन्दू व्रत विधियां 2017
Vrat Vidhi 2017