शुक्रवार व्रत

हिन्दू धर्मानुसार शुक्रवार के दिन व्रत करना बेहद लाभकारी माना जाता है। इस दिन संतोषी माता का व्रत किया जाता है। साथ ही इस दिन कई श्रद्धालु शुक्र ग्रह की भी पूजा करते हैं।

शुक्रवार व्रत विधि (Shukarvar puja Vidhi in Hindi)

शुक्रवार का व्रत शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से आरंभ करना शुभ माना जाता है। नारद पुराण के अनुसार शुक्रवार के दिन श्वेत वस्त्र धारण करना चाहिए। इस दिन व्यक्ति को पूरे विधि-विधान से शुक्र देव और लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा समाप्त होने के बाद उन्हें खीर का भोग लगाना चाहिए। भोग लगाने के बाद पहले खीर सफेद गाय को खिलाना चाहिए उसके बाद स्वयं भी खाने में खीर ही खाना चाहिए।

व्रत समाप्ति के दिन पूरे विधि पूर्वक लक्ष्मी जी की स्थापना कर उनकी पूजा करनी चाहिए तथा पूजा के दौरान “द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए तथा हवन करके सफेद कपड़ा, चांदी का सिक्का, फल, दूध आदि ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

संतोषी माता व्रत विधि (Santoshi Mata Vrat Vidhi in Hindi)

संतोषी माता की पूजा करने के लिए जातकों शुक्रवार के दिन खटाई खाने, झूठ बोलने और अन्य बुरे काम करने से बचना चाहिए। शुक्रवार के दिन सुबह घर की सफाई आदि करने के बाद संतोषी माता की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। मूर्ति के सामने कलश रखना चाहिए और उस पर दीपक जलाना चाहिए।

इस दिन संतोषी माता को गुड़ और चने का भोग लगाना चाहिए। शाम के समय संतोषी माता की कथा सुनकर माता को चढ़ाए हुए गुड़ और चने प्रसाद के रूप में बांट देना चाहिए।

शुक्रवार व्रत का फल (Benefits Of Shukarvar Vrat in Hindi)

शुक्रवार का व्रत करने से व्यक्ति को कला के क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त होता है तथा व्यक्ति का वैवाहिक जीवन सुखमय हो जाता है। इस दिन खटाई या खट्टी चीजें बिलकुल नहीं खानी चाहिए।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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