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प्रबोधिनी एकादशी व्रतPrabodhini Ekadashi

प्रबोधिनी एकादशी व्रत (Prabodhini Ekadashi)

हिन्दू मान्यतानुसार एकादशी का महत्त्व भगवान विष्णु की पूजा आराधना के लिए है। कार्तिक माह की एकादशी को महत्त्वपूर्ण माना जाता है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को "प्रबोधिनी" एकादशी का नाम दिया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने आराम करने के बाद जागते हैं। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी या देव उठनी एकादशी भी कहते हैं।

प्रबोधिनी एकादशी व्रत 2016 (Prabodhini Ekadashi Vrat 2016)

हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2016 में प्रबोधिनी एकादशी व्रत, 10 नवम्बर को रखा जाएगा।

प्रबोधिनी एकादशी व्रत विधि (Prabodhini Ekadashi Vrat Vidhi in Hindi)

पद्म पुराण में एकादशी व्रत से संबंधित सभी नियमों और कथा आदि का वर्णन है। पद्म पुराण के अनुसार प्रबोधिनी एकादशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर पवित्र होना चाहिए। इसके बाद  फल, फूल, कपूर, अरगजा, कुमकुम, तुलसी आदि से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।

प्रबोधिनी एकादशी व्रत वाले दिन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के विविध मंत्र पढ़े जाते हैं। इस दिन नैवेद्य के रूप में विष्णु जी को ईख, अनार, केला, सिंघाड़ा आदि अर्पित करने चाहिए। इस दिन उपवास करके रात में सोते हुए भगवान हरि विष्णु जी को गीत आदि गाकर जगाना चाहिए।

इसके बाद रात बीतने पर दूसरे दिन सवेरे स्नान आदि नित्यकर्मों के बाद श्री हरि की पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन करा उन्हें दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए। अंत में भोजन ग्रहण कर उपवास खोलना चाहिए।

तुलसी का विशेष महत्त्व (Particular Importance of Basil in Hindi)

प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्तों का विशेष महत्त्व होता है। कई लोग इस दिन तुलसी विवाह भी करते हैं जिसमें विष्णु जी के स्वरूप शालिग्राम जी और तुलसी जी का विवाह कराया जाता है।

प्रबोधिनी एकादशी व्रत का महत्त्व (Importance of Prabodhini Ekadashi in Hindi)

मान्यता है कि प्रबोधिनी एकादशी व्रत करने से अश्वमेध तथा सौ यज्ञों का फल मिलता है। इस पुण्य व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है तथा वह स्वर्ग प्राप्त करता है। प्रबोधिनी एकादशी के दिन जप, तप, गंगा स्नान, दान, होम आदि करने से अक्षय फल प्राप्त होता है।

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हिन्दू व्रत विधियां 2017
Vrat Vidhi 2017