पद्मा एकादशी व्रत

हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी या परिवर्तिनी एकादशी (Padma Ekadashi) कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन आषाढ़ मास से शेष शैय्या पर सोए भगवान विष्णुजी करवट बदलते हैं। 


इस शुभ दिन भगवान विष्णु और उनके अवतार वामन रूप की पूजा की जाती है तथा पालकी में मूर्तियों को स्थापित कर शोभा यात्रा निकाली जाती है। 


पद्मा एकादशी व्रत 2017 (Padma Ekadashi Vrat 2017)
साल 2017 में पद्मा एकादशी व्रत 02 सितम्बर को रखा जाएगा।


पद्मा एकादशी व्रत विधि (Padma Ekadashi Vrat Vidhi in Hindi)
पद्मा एकादशी व्रत वाले दिन भगवान विष्णु तथा उनके वामन अवतार का धूप, तुलसी के पत्तों, दीप, नेवैद्ध व फूल आदि से पूजा करने का विधान है। इस शुभ व्रत तिथि के दिन सात कुम्भों यानि घड़ों को अलग- अलग अनाजों (गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौं, चावल और मसूर) से भरकर रखा जाता है। पद्मा एकादशी से एक दिन पहले यानि दशमी के दिन गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौं, चावल तथा मसूर नहीं खानी चाहिए।


स्थापित किए हुए घड़े के ऊपर भगवान विष्णु तथा वामन अवतार की मूर्ति रखकर पूजा करने का विधान है। पद्मा एकादशी व्रत वाली रात को भगवान का भजन- कीर्तन या जागरण करना चाहिए। पद्मा पुराण के अनुसार व्रत अगले यानि द्वादशी के दिन भगवान का पूजन कर ब्राह्मण को भोजन और दान देने का विधान बताया गया है। अंत में भोजन ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।


पद्मा एकादशी व्रत का महत्त्व (Importance of Padma Ekadashi Vrat in Hindi)
पद्म पुराण के अनुसार पद्मा एकादशी व्रत करने से साधक के सभी पापों का नाश तथा सभी भोग वस्तुओं की प्राप्ति होती है। इस महान व्रत के प्रभाव से व्रती, मोक्ष तथा मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम प्राप्त करता है।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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