नवरात्र पूजा विधि

नवरात्र पूजा विधि (Navratra Puja Vidhi)

नवरात्र के नौ दिन देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र व्रत (Navratri Puja Vidhi) की शुरूआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है। नवरात्र के नौ दिन प्रात:, मध्याह्न और संध्या के समय भगवती दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। श्रद्धानुसार अष्टमी या नवमी के दिन हवन और कुमारी पूजा कर भगवती को प्रसन्न करना चाहिए।

चैत्र नवरात्र 2017 (Chaitra Navratri 2017)

चैत्र महीने में मनाई जाने वाली नवरात्रि 28 मार्च से 5 अप्रैल तक मनाई जाएगी। 28 मार्च को सुबह 08 बजकर 26 मिनट से लेकर 10 बजकर 24 मिनट तक घटस्थापना का  शुभ मुहूर्त  है।

शारदीय नवरात्र 2017 (Shardiya Navratri 2017)

इस बार शारदीय नवरात्र 21 सितम्बर 2017 से शुरु होंगे। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 21 सितम्बर को सुबह 06:12 मिनट से लेकर 08:09 तक का समय कलश स्थापना के लिए शुभ है। नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है।

नवरात्र के 10 दिन प्रात:, मध्याह्न और संध्या के समय भगवती दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। श्रद्धानुसार अष्टमी या नवमी के दिन हवन और कुमारी पूजा कर भगवती को प्रसन्न करना चाहिए। 

नवरात्र में हवन और कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। नारदपुराण के अनुसार हवन और कन्या पूजन के बिना नवरात्र की पूजा अधूरी मानी जाती है। साथ ही नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए लाल रंग के फूलों व रंग का अत्यधिक प्रयोग करना चाहिए। नवरात्र में "श्री दुर्गा सप्तशती" का पाठ करने का प्रयास करना चाहिए। 

परंपरागत रूप से हिंदू धर्म में, शराब और गैर-शाकाहारी भोजन का उपभोग अशुभ और अपवित्र माना जाता है लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। इन उपवासों के दौरान लोग मांस, अनाज, शराब, प्याज, लहसुन आदि खाने से बचते हैं। आयुर्वेदिक परिप्रेक्ष्य से, ये खाद्य पदार्थ नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं और अवशोषित करते हैं। इसके अलावा, मौसमी बदलाव के दौरान ऐसे पदार्थों से बचा जाना चाहिए क्योंकि हमारे शरीर ऐसे समय के दौरान कम प्रतिरक्षा रखते हैं।     

नवरात्री के दौरान घर पर बनाये जाने वाले व्यंजन         

साबूदाना खिचड़ी: साबूदाना में स्टार्च या कार्बोहाइड्रेट होता है जो उपवास के दौरान आपको आवश्यक ऊर्जा देता है। साबूदाना की खिचड़ी साबूदाना, मूंगफली और हल्के मसालों के साथ बनाया गया एक हल्का डिश। नुस्खे के लिए लिंक:http://food.ndtv.com/recipe-sabudana-khichdi-280328           

कुट्टू का डोसा: इन नवरात्रों में सामान्य कुट्टू की पूड़ियो के अलावा कुछ और नया बनायें। कुट्टू का डोसा एक कुरकुरा डोसा हे जिसमे आलू भरा हुआ है। नुस्खे के लिए लिंक:http://food.ndtv.com/recipe-kuttu-ka-dosa-100490               

 सिंगाड़े के आटे का सामोसा: आपकी चाय के साथ खाने वाला पसंदीदा पकवान। इसे बनाने के लिए पानी में  शहतीज का आटा, सेंधा नमक और मसालेदार चिरोंजी का इस्तेमाल करें। नुस्खे के लिए लिंक: http://food.ndtv.com/recipe-singhare-ke-atte-ka-samosa-279830               

आलू की कढ़ी: हलकी और स्वादिष्ट कड़ी। नुस्खे के लिए लिंक: http://food.ndtv.com/recipe-aloo-ki-kadhi-483509                 

लो फैट वाली मखाना खीर: डेसर्ट ज़िन्दगी में उत्साह लाते हैं। यह खीर मखाना और नट्स के साथ बनाई गयी है। वज़न बढने की चिंता को भुला कर इस खीर का मज़ा लें। नुस्खे लिए लिंक:http://food.ndtv.com/recipe-low-fat-makhana-kheer-100492           

केले अखरोट की लस्सी: इस पौष्टिक पेय के साथ अपने आप को चार्ज करें। यह लस्सी दही, केला, शहद और अखरोट को मिला कर बनाई गयी है। नुस्खे के लिए लिंक:http://food.ndtv.com/recipe-banana-walnut-lassi-227442                     

अर्बि कोफ्ता मिंट योगर डिप के साथ: नवरात्रों के दौरान आपके लिए एकदम सही चाय-टाइम स्नैक्स। नुस्खे के लिए लिंक: http://food.ndtv.com/recipe-arbi-kofta-with-mint-yoghurt-dip-673808                   

व्रतवाले चावल का ढोकला: एक ताजा नुस्खा है जो आपको सामान्य तले हुए पकोड़े और पुरी के अलावा भी विकल्प देता है। नुस्खे के लिए लिंक:http://food.ndtv.com/recipe-vratwala-chawal-dhokla-218276       

कबाब-ए-केला: उपवास अब उबाऊ नहीं होगा मसालेदार केले कबाब जो पूरी तरह से आपके मुंह में पिघल जाते हैं और आपकी आत्मा को खुश करते हैं। नुस्खे के लिए लिंक:http://food.ndtv.com/recipe-kebab-e-kela-430420            

सोंठ की चटनी: अपने नियमित पकोड़े या भाज्जी के लिए एक सही पूरक है और यहां तक कि आपके व्रत-अनुकूल नाश्ते के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। नुस्खे के लिए लिंक:http://food.ndtv.com/recipe-sonth-ki-chutney-vrat-596573    

नवरात्री के व्रत के​ समय क्या ना खायें

फलों के रस: अब, क्योंकि हम उपवास करते हैं, इसका अर्थ यह नहीं है कि हम जितना मन चाहे उतना उसे पियें। यहाँ तक की व्रत वाले दिन ताज़ा फलों का रस भी ज्यादा नहीं पीना चाहिए इसका कारण यह है की फलों के रस में बहुत अधिक मात्र में चीनी होती है और यही नहीं फलों के रस में फायदेमंद फाइबर, और एंटी-ऑक्सीडेंट की कमी भी होती है। न सिर्फ फलों के रस मधुमेह के जोखिम को बढ़ाते हैं, यह बच्चों में मोटापे की समस्या को भी जन्म देते है। यह रस खून में शुगर की मात्रा को भी बढ़ाते है। इसके अलावा, ये रस आपका पेट भर नहीं पाते क्यूंकि इनमे फाइबर की कमी होती है। तो, अच्छा यही है की आप पुरे फल को साबुत खाएं, इसके इलावा आप हरी सब्जी के रस को पी सकते हैं क्योंकि उनमे चीनी की मात्रा कम होती है और आपके रक्त शर्करा के स्तर को भी परेशान नहीं करते।                 

फ्राइड खाने को छोड़े: तले हुए नाश्ता आपको एक दिन के लिए आवश्यक सभी कैलोरी दे सकता है। लेकिन उपवास का उद्देश्य शरीर के अन्दर की सारी गन्दगी को साफ़ करना होता है न की गन्दगी बढाना। जिस हाइड्रोजनीकृत तेल में इन स्नैक्स को बनाया जाता है उससे कई बीमारियाँ जैसे दमा, धमनियों में  रूकावट और मधुमेह हो सकती है । इसलिए, व्रत वाले दिन तली हुई पूरियों के स्थान पर रोटी आलू या सीताफल की सब्जी के साथ खाएं।                    

चीनी शरीर के लिए हानिकारक है: चीनी चाहे सफेद हो या भूरे रंग की उसमे पोषण की मात्रा शुन्य है। चीनी न सिर्फ आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमज़ोर करती है बल्कि यह आपके पेट के स्वस्थ्य को भी ख़राब करती है। इन नवरात्रों में चीनी का त्याग करें और आप निश्चित रूप से उत्साहित और स्वस्थ महसूस करेंगे। गुड़ या नारियल के चीनी का इस्तेमाल करके अपनी साबूदाने की खीर को ज़ायकेदार बनाये। पारंपरिक गुड़ में सेलेनियम, जिंक, और लोहा होता है और यह शरीर से गंदे पदार्थों को बाहर निकालता है। साथ ही, आप प्राकृतिक रूप से मीठे फलों को खा सकते है।                

प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फ़ूड: नवरात्रि के दौरान सुपर बाजारों में व्रत के नमकीन और तरह-तरह के जंक फ़ूड उपलब्ध होते हैं। हलाकि यह दावा किया जाता है की यह स्वस्थ के लिए अच्छे हैं, लेकिन यीह प्रचार सही नहीं है। पैकेज्ड खाने में सोडियम, चीनी और हानिकारक तेलों का इस्तेमाल होता है। यही नहीं जिन रसायनों से ऐसे खाने के इस्तेमाल की उम्र बढाई जाती है वह सेहत के लिए हानिकारक होते है। आज कल लगभग 3000 से अधिक खाद्य योजको और रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।                    ​

कंजक पूजा परिचय:       

कंजक पूजा नवरात्रि के अष्टमी या नौवीं (आठवीं या नौवें दिन) पर की जाता है। देवी को आभार देने का यह एक और तरीका है। कुमारी पूजा या कंजक को  देवी महाकाली द्वारा दानव कलासुरा के वध के उपलक्ष में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कलासुरा ने स्वर्ग और पृथ्वी दोनों को परेशान करना शुरू कर दिया था और कोई भी उसे पराजित नहीं कर पा रहा था। कलासुरा को रोकने के प्रयास में, अन्य देवताओं ने देवी महाकाली से संपर्क किया था जिन्होंने देवी दुर्गा के रूप में पुनर्जन्म लिया था। देवी ने एक छोटी लड़की का रूप ले लिया और कलासुरा से संपर्क किया। 

कलासुरा ने जब यह देखा की एक छोटी सी लड़की उसको चुनोती दे रही है तो वह लापरवाह हो गया  और उसने यह सोचा की वह बड़ी असानी से उस कन्या को पराजित कर देगा। उस समय पर, देवी महाकाली ने अपनी तलवार को निकाला और उसे मार दिया। एक अन्य कथा से पता चलता है कि एक युवा लड़की (कन्या / कुंवारी) की पूजा की जाती है क्योंकि वह उसका सबसे शुभ स्वरूप है बाद में, वह एक पत्नी और माता (पार्वती, लक्ष्मी) की भूमिका, अपने बच्चों (सरस्वती) की शिक्षक की भूमिका और सभी बाधाओं (दुर्गा) के विनाश की भूमिका ग्रहण कर लेती है।                    

कंजक पूजा विधि:

परंपरा कहती हैं कि घर की महिला 9 लड़कियों का स्वागत उनके पैरों को धो कर और उनकी कलायिओं पर मोली या लाल धागा बांध कर करती है। इन लड़कियां को एक पंक्ति में बैठाया जाता है और उपहारों के साथ हलवा, पूरी और छोले (जिसे 'भोग' भी कहा जाता है) दिए जाते है। इन छोटी लड़कियों को देवी दुर्गा के अवतार के रूप में देखा जाता है।कंजक पूजा आरम्भ करने से पहले कुछ वस्तुओं का होना आवश्यक है।  उन वस्तुओं की सूचि इस प्रकार है: कलश (पिचर), आम के पत्ते, नारियल, रौली (कुमकुम), हल्दी, लाल पवित्र धागा, चावल, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची, फूल, बेल पत्ते, मिठाई और दीपक। कलश को ऊपर तक पानी से भरें। कलश के मुंह पर आम के पत्ते को रखें। कलश की गर्दन पर पवित्र धागा बांधें कलश के पास देवी दुर्गा की मूर्ति को रखें और उनकी हल्दी, कुमकुम, फूल, चावल, बेल पत्तियों आदि से पूजा करें। 

लड़कियों के आने के बाद, उनके पैरों को धोने के लिए पानी को तैयार रखें। लड़कियों के पेरों को पानी से धोएं। कंजकों की उसी तरह से पूजा करें जिस तरह से आपने देवी दुर्गा की मूर्ति की पूजा की है। हल्दी, कुमकुम, चावल आदि को कंजकों पर लगायें। लड़कियों के सामने एक दीपक और धूप जलाएं। कंजकों को दियी जाने वाला भोजन शाकाहारी होना चाहिए और उसे घी पकाना चाहिए। आम तौर पर कंजकों को पूरी, काला चना, आलू की सबजी और हलवा खिलाया जाता है। लड़कियों को खिलाने के बाद, उन्हें उपहार दें उपहार में एक चुनरी, चूड़ी, कुमकुम, हल्दी, मिठाई और पैसे शामिल होना चाहिए।

नवरात्री समापन

नौ दिनों के पूजा खत्म हो जाने के बाद, दसवीं दिन पर दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। दसवें दिन, नहा-धो कर पूजा स्थान पर बैठें। माँ दुर्गा की मूर्ति को चोव्की से उठा कर उस स्थान पर रखें जहाँ पर वह स्थाई रूप से रखी जाती है। चोव्की पर रखे चढ़ावे को इकठा कर के उसे प्रसाद के रूप में लोगों में बाँट दें। चावल के दानो को पक्षियों में बाँट दें। कलश में रखे गंगा जल को अपने परिवार के सदस्यों और पूरे घर में छिड़क दें। 

सिक्कों को बाहर निकालें और उन्हें अपने दूसरे पैसे के साथ रखें। आम तौर पर मिट्टी के बर्तन में जौ के विकास पर निगरानी राखी जाती है। जौ के बीज को शकमभारी देवी माता के सम्मान में लगाया जाता है (जो दुर्गा पाठ के 11 वें अध्याय में वर्णित है और जो माँ दुर्गा की ही एक रूप हैं)। माँ शकमभारी देवी पोषण की माता हैं। यदि जौ के बीज बढ़ते हैं और प्रचुर मात्रा में ताजे हरे रंग में उगते हैं, तो यह एक निश्चित संकेत है कि आपके परिवार को समृद्धि और खुशी का आशीर्वाद मिलेगा। कुछ अंकुरित जौ माता दुर्गा को अर्पण करें।

श्रीमद्देवी भागवत के अनुसार नवरात्र पूजा (Navratri Puja Vidhi in Hindi) से जुड़ी कुछ विशेष बातें निम्न हैं:

* यदि श्रद्धालु नवरात्र में प्रतिदिन पूजा ना कर सके तो अष्टमी के दिन विशेष पूजा कर वह सभी फल प्राप्त कर सकता है। 
* अगर श्रद्धालु पूरे नवरात्र में उपवास ना कर सके तो तीन दिन उपवास करने पर भी वह सभी फल प्राप्त कर लेता है। कई लोग नवरात्र के प्रथम दिन और अष्टमी एवम नवमी का व्रत करते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह भी मान्य है। 
* नवरात्र व्रत देवी (Navratri Puja Vidhi) पूजन, हवन, कुमारी पूजन और ब्राह्मण भोजन से ही पूरा होता है।

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शारदीय नवरात्र की पूर्ण विधि जानने के लिए क्लिक करें: Shardiya Navratri Puja Vidhi 

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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