मनोरथ पूर्णिमा व्रत

मनोरथ पूर्णिमा का व्रत फाल्गुन की पूर्णिमा से पूरे एक वर्ष तक किया जाता है। अपने नाम की ही तरह यह व्रत व्यक्ति के सभी मनोरथ पूर्ण करने वाला माना गया है। इस दिन देवी लक्ष्मी सहित भगवान विष्णु के जनार्दन रूप की पूजा की जाती है।

मनोरथ पूर्णिमा व्रत विधि (Manorath Purnima Vrat Vidhi in Hindi)

नारद पुराण के अनसार मनोरथ पूर्णिमा व्रत रखने वाले व्रती को फाल्गुन माह की पूर्णिमा को प्रातः उठकर संभव हो तो नदी में स्नान करना चाहिए। पूजा घर में लक्ष्मी तथा भगवान जनार्दन की पूरे विधि- विधान से पूजा करनी चाहिए। किसी भी काम को करते समय भगवान जनार्दन का नाम जपते रहना चाहिए।

रात में लक्ष्मी तथा भगवान जनार्दन को ध्यान में रखते हुए उन्हें अर्घ्य देने के बाद एक समय बिना तेल का भोजन करना चाहिए। शाम के समय व्रत खोलना चाहिए।

माह के अनुसार मनोरथ पूर्णिमा व्रत (Manorath Purnima Vrat According to the Month)

मनोरथ पूर्णिमा व्रत में चैत्र, बैसाख, ज्येष्ठ के महीने में व्रती को विधिपूर्वक पूजा करके रात के समय भोजन करना चाहिए। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद और अश्विन माह में लक्ष्मी समेत भगवान विष्णु की श्रीधर के रूप में पूजा करनी चाहिए तथा रात के समय चंद्रमा को जल चढ़ाना चाहिए।

इसी प्रकार कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष तथा माघ के महीने में भूति सहित भगवान विष्णु के केशव रूप की आराधना करनी चाहिए। रात के समय चंद्रमा को जल चढ़ाने के बाद भोजन ,ग्रहण करना चाहिए। चाहिए। अंत में ब्राह्मण को शक्तिनुसार दान देना चाहिए।

मनोरथ पूर्णिमा व्रत फल (Benefits of Manorath Purnima Vrat)

भविष्यपुराण के अनुसार इस प्रकार पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी और विष्णु की पूजा करने वाले व्यक्ति को कई जन्मों तक इष्ट वियोग नहीं सहना पड़ता है। उसके सभी मनोरथपूर्ण हो जाते हैं और पुरुष नारायण का स्मरण करते हुए दिव्यलोक जाता है।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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