ललिताषष्ठी व्रत

ललिताषष्ठी व्रत भद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को रखा जाता है। साल 2017 में यह व्रत 25 सितंबर को मनाया जाएगा। यह व्रत उन स्त्रियों के लिए बहुत शुभ होता है जिन्हें सौभाग्य और संतान की कामना होती है। इस दिन विशेष तौर पर ललिता देवी के रूप में माता पार्वती की पूजा की जाती है।

ललिताषष्ठी व्रत विधि (Lalitaastami Vrat Vidhi in Hindi)

ललिताषष्ठी के दिन व्रती को प्रातः उठकर नदी में स्नान करना चाहिए। बांस के एक नए पत्ते में बालू रखकर उसे घर पर लाकर, नए कपड़े से एक मंडप बनाना चाहिए। इस मंडप में बालू से भरे बांस के पत्ते को स्थापित करना चाहिए। मंडप में बालुकामयी, तपोवन- निवासिनी भगवती ललिता गौरी का ध्यान करना चाहिए।

इस प्रकार विभिन्न तरह के फूल, सब्जी, फल मिठाई आदि के साथ धूप, दीप, वस्त्र और आभूषण देवी को समर्पित करना चाहिए। संभव हो तो रात को माता का जागरण करना चाहिए। अगले दिन बालूमय गौरी की पूजा कर उसे नदी में विसर्जित कर देना चाहिए तथा 15 ब्राह्मण और कन्याओं को भोजन करा कर उन्हें दान देना चाहिए।

ललिताषष्ठी पूजा मंत्र (Lalitaastami Puja Mantra in Hindi)

ललिताषष्ठी को देवी को पूजा सामग्री चढ़ाते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:

ललिते ललिते देवि सौख्यसौभाग्यदायिनि।
या सौभाग्यसमुत्पत्रा तस्यै दैव्यै नमो नमः।।

ललिताषष्ठी व्रत फल (Benefits of Lalitaastami Vrat in Hindi)

भविष्यपुराण के अनुसार ललिताषष्ठी व्रत से व्यक्ति को संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है किसी भी वस्तु की दुर्लभता का सामना उन्हें नहीं करना पड़ता है। इसी प्रकार व्रत करने वाली स्त्रियों को कई काल तक सुख- सौभाग्य को प्राप्त करती हैं।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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