कार्तिक पूर्णिमा व्रत

कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन वृषोसर्ग व्रत रखा जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान कार्तिकेय और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान हैं। यह व्रत शत्रुओं का नाश करने वाला माना जाता है। इसे नक्त व्रत भी कहा जाता है।

2016 में कार्तिक पूर्णिमा की तिथि (Kartik Purnima Vrat Dates)

वर्ष 2016 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन वृषोसर्ग व्रत या नक्त व्रत 14 नवंबर को रखा जाएगा।

कार्तिक पूर्णिमा की विधि (Kartik Purnima Vrat Vidhi in Hindi)

नारद पुराण के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा (Kartik Purnima 2017) के दिन स्नान आदि कर उपवास रखते हुए भगवान कार्तिकेय की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इसी दिन प्रदोष काल में दीप दान करते हुए संसार के सभी जीवों के सुखदायक माने जाने वाले वृषोसर्ग व्रत का पालन करना चाहिए।

इस दिन दीपों का दर्शन करने वाले जंतु जीवन चक्र से मुक्त हो मोक्ष को प्राप्त करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्थान करना चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्र उदय के बाद वरुण, अग्नि और खड्गधारी कार्तिकेय की गंध, फूल, धूप, दीप, प्रचुर नैवेद्य, अन्न, फल, शाक आदि से पूजा कर हवन करना चाहिए।

इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उन्हें दान देना चाहिए। घर के बाहर दीप जलाना चाहिए और उसके पास एक छोटा सा गड्ढा खोदकर उसे दूध से भरना चाहिए। गड्ढे में मोती से बने नेत्रों वाली सोने की मछली डालकर उसकी पूजा करते हुए "महामत्स्याय नमः" मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। पूजा के बाद सोने की मछली को ब्राह्मण को दान कर देनी चाहिए।

वृषोसर्ग व्रत फल (Benefits Vrisosrg Vrat in Hindi)

नारद पुराण के अनुसार इस व्रत का श्रद्धापूर्ण पाल करने से व्रती को ब्राह्मणतत्व की प्राप्ति होती है तथा उसके सभी शत्रुओं का नाश हो जाता है। इसके अलावा इस व्रत के पुण्य फल से व्यक्ति मृत्यु के बाद विष्णु लोक जाकर विभिन्न प्रकार के सुख भोगता है।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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