कालाष्टमी व्रत

कालाष्टमी का त्यौहार हर माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन कालभैरव की पूजा की जाती है जिन्हें शिवजी का एक अवतार माना जाता है। इसे कालाष्टमी, भैरवाष्टमी आदि नामों से जाना जाता है।

कालाष्टमी व्रत विधि (kalaashtami vrat vidhi in Hindi)

नारद पुराण के अनुसार कालाष्टमी के दिन कालभैरव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन शक्ति अनुसार रात को माता पार्वती और भगवान शिव की कथा सुन कर, जागरण का आयोजन करना चाहिए। कालभैरो की सवारी कुत्ता है अतः इस दिन कुत्ते को भोजन करवाना शुभ माना जाता है।

कालाष्टमी 2016 (kalaashtami 2016)

इस वर्ष कालाष्टमी का व्रत 2 जनवरी को रखा जाएगा।

क्यों रखा जाता है कालाष्टमी का व्रत (story of kalaashtami vrat in Hindi)

कथा के अनुसार एक दिन भगवान ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठ होने का विवाद उत्पन्न हुआ। विवाद के समाधान के लिए सभी देवता और मुनि शिव जी के पास पहुंचे। सभी देवताओं और मुनि की सहमति से शिव जी को श्रेष्ठ माना गया। परंतु ब्रह्मा जी इससे सहमत नहीं हुए। ब्रह्मा जी, शिव जी का अपमान करने लगे।

अपमान जनक बातें सुनकर शिव जी को क्रोध आ गया जिससे कालभैरव का जन्म हुआ। उसी दिन से कालाष्टमी का पर्व शिव के रुद्र अवतार कालभैरव के जन्म दिन के रूप में मनाया जाने लगा।

 

कालाष्टमी व्रत फल (Benefits of kalaashtami vrat in Hindi)

कालाष्टमी व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट मिट जाते हैं काल उससे दूर हो जाता है। इसके अलावा व्यक्ति रोगों से दूर रहता है तथा उसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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