जया एकादशी व्रत विधि

हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही पुण्य माना जाता है, क्योंकि इसके प्रभाव से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। पद्म पुराण के अनुसार माघ माह की शुक्ल एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करने का विधान है।

जया एकादशी व्रत 2016 (Jaya Ekadashi Vrat 2016)

साल 2016 में जया एकादशी व्रत 18 फरवरी को रखा जाएगा।

जया एकादशी व्रत विधि (Jaya Ekadashi Vrat Vidhi in Hindi)

जया एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के अवतार 'श्रीकृष्ण जी' की पूजा का विधान है। जो व्यक्ति जया एकादशी व्रत का संकल्प लेना चाहता है, उसे व्रत के एक दिन पहले यानि दशमी के दिन एक बार ही भोजन करना चाहिए।

इसके बाद एकादशी के दिन व्रत संकल्प लेकर धूप, फल, दीप, पंचामृत आदि से भगवान की पूजा करनी चाहिए। जया एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए, बल्कि भगवान का भजन- कीर्तन व सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए।

द्वादशी अथवा पारण के दिन स्नानादि के बाद पुनः भगवान का पूजन करने का विधान है। पूजन के बाद भगवान को भोग लगाकर प्रसाद वितरण करना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करा कर क्षमता अनुसार दान देना चाहिए। अंत में भोजन ग्रहण कर उपवास खोलना चाहिए।

जया एकादशी व्रत का महत्त्व (Importance of Jaya Ekadashi Vrat in Hindi)

जया एकादशी के दिन व्रत करने से समस्त वेदों का ज्ञान, यज्ञों तथा अनुष्ठानों का पुण्य मिलता है। जया एकादशी व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है। यह व्रत व्यक्ति को भोग तथा मोक्ष प्रदान करता है। इस पुण्य व्रत को करने से मनुष्य को कभी भी प्रेत योनि में नहीं जाना पड़ता।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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