बुधाष्टमी व्रत

शुक्ल पक्ष की अष्टमी यदि बुधवार को पड़े तो उसे बुधाष्टमी कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले जातकों को मोक्ष प्राप्त होता है। भविष्य पुराण के अनुसार इस व्रत की महिमा से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं तथा उसे विभिन्न सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन बुध ग्रह को शांत करने के लिए शिव के भैरो रुप की पूजा की जाती है। वर्ष 2016 में 10 अगस्त को बुधाष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।

बुधाष्टमी व्रत कथा (Budha Astami Vrat Katha in Hindi)

भविष्यपुराण की एक कथा के अनुसार इल नाम के राजा रहा करते थे। एक बार वह हिरण का पीछा करते हुए, उस वन में जा पहुंचे जहां भगवान शिव और पार्वती जी भ्रमण कर रहे थे। उस समय शिव जी का आदेश था कि वन में पुरुष प्रवेश करते ही स्त्री में बदल जाए।

इसलिए जैसे ही राजा इल ने वन में प्रवेश किया वह स्त्री बन गए। इल के उत्तम स्वरूप को देख बुध देव उन पर मोहित हो गए तथा उनसे विवाह कर लिया। जिस दिन इल और बुध का विवाह हुआ उस दिन अष्टमी तिथि थी, तभी से बुधाष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा।

बुधाष्टमी व्रत विधि (Budha Astami Vrat Vidhi in Hindi)
 
शुक्ल पक्ष की अष्टमी को एकभुक्त- व्रत करना चाहिए। इस दिन संभवतः प्रातः नदी में स्नान कर नदी के पानी को कलश में भरकर उसे घर में स्थापित करना चाहिए। बुधाष्टमी के दिन बुध देव की पूजा के साथ बुधाष्टमी की कथा सुननी चाहिए।

बुधाष्टमी के दिन 8 प्रकार के पकवान बनाकर बांस के पत्तों में रखना चाहिए। इस भोजन को फल, फूल, धूप आदि के साथ बुध देव को अर्पण करना चाहिए। अंत में इस भोजन को अपने मित्रगण के साथ बांटकर खाना चाहिए।

बुधाष्टमी पूजा मंत्र (Budha Astami Puja Mantra in Hindi)

बुधाष्टमी व्रत में बुध देव की पूजा करते समय इन मत्रों का उच्चारण करना चाहिए:

ऊं बुधाय नमः,  ऊं सोमामात्मजाय नमः
ऊं दुर्बुद्धिनाशनाय,  ऊं सुबुद्धिप्रदाय नमः
ऊं ताराजाताय,ऊं सोम्यग्रहाय नमः
ऊं सर्वसौख्याप्रदाय नम:।

बुधाष्टमी व्रत का फल (Benefits of Budha Astami Vrat in Hindi)

बुधाष्टमी के दिन पूरे विधि विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति के सात जन्म के पाप मिट जाते हैं। धन, धान्य, पुत्र, पौत्र, ऐश्वर्य आदि सुखों का भोग कर अपना अंत समय तीर्थ स्थान पर व्यतीत करता है तथा मृत्यु के पश्चात स्वर्ग को जाता है।

हिन्दू व्रत विधियां 2017

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