उपनयन (जनेऊ) संस्कार

यज्ञोपवित यानि उपनयन संस्कार सबसे पवित्र संस्कार होता है। हिन्दू धर्म के अनुसार यह संस्कार एक समय मुख्य आवश्यकता मानी जाती थी। हालांकि आज के समय में इसका बेहद कम उपयोग होता है। उपनयन संस्कार के अनुसार मनुष्य जनेऊ धारण कर आयु, बल और तेज को बढ़ा सकता है।
 

जनेऊ धारण करना

जनेऊ धारण करना उपनयन संस्कार का एक अहम भाग है। इस दौरान सूत के धागे को यज्ञोपवीतधारी व्यक्ति बाएँ कंधे के ऊपर तथा दाएँ बांह के नीचे पहनता है। एक बार जनेऊ धारण करने के बाद मनुष्य इसे उतार नहीं सकता।

* उपनयन संस्कार से जुड़ी अन्य बातें
* उपनयन संस्कार के साथ मुंडन और पवित्र जल में स्नान भी किया जाता है।
* उपनयन संस्कार और जनेऊ धारण के बाद मनुष्य को जनेऊ से जुड़े नियमों का पालन करना होता है।
* इस संस्कार में गायत्री मंत्र का विशेष महत्व है।

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