क्रिया की प्रतिक्रिया होती है

हिन्दू सनातन धर्म में मान्यता है कि जो जैसा बोता है वैसा ही काटता भी है और जो जैसा करता है वैसा भी भोगता है। हिन्दू धर्म इस बात पर जोर देता है कि जो जैसा करेगा वैसा ही भरेगा। कई कथाओं और प्रसंगों से यह बात जाहिर होती है। हिन्दू धर्म में इस बात पर इतना अधिक जोर दिया गया है कि इसे मुख्य दर्शनों में शामिल किया गया है। “क्रिया की प्रतिक्रिया” नामक दर्शन इसी से संबंधित है। 


भगवान हो या इंसान सबको भुगतना है कर्मों का फल 


हिन्दू धर्म में आत्मा को अजर-अमर माना गया है जो अपने कर्मों के कारण बार-बार इस संसार में जन्म लेती है। एक जन्म के किए हुए पापों और पुण्यों के आधार पर अगले जन्म में नया शरीर प्राप्त होता है। कर्म अच्छे हों तो अच्छा जीवन और योनि (शरीर) मिलती है अन्यथा बुरी योनि या श्रेणी में जन्म लेना पड़ता है। हिन्दू धर्म दर्शन के अनुसार कर्मों के फेर से सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि भगवान भी बंधे हुए हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने राम अवतार में वानर राज बाली का वध धोखे से छुप कर किया था जिसके परिणाम स्वरूप कृष्ण अवतार में उनकी मृत्यु एक बहेलिये के द्वारा हुई जिसने छुपकर कृष्ण जी पर बाण चलाया था। 


उपरोक्त केवल एक कथा है लेकिन हिन्दू धार्मिक पुस्तकों में ऐसी हजारों कथाएं हैं जो इस बात पर जोर देती हैं कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। हम जो भी काम करते हैं वह किसी लक्ष्य के लिए ही करते हैं।  लक्ष्य के लिए किया गया कार्य अगर सही हो तो सही परिणाम मिलते हैं अन्यथा बुरे काम का तो बुरा ही परिणाम होता है। 


हिन्दू धर्म मानता है कि अगर आप अपने द्वारा किए गए पापों मुक्त होने चाहते हैं तो अधिक से अधिक पुण्य का अर्जन कीजिए । अगर हम पाप अधिक करेंगे तो उसकी प्रतिक्रिया भी पापी प्रवृत्ति की ही होगी जो हमें दुख देगी। 

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