धार्मिक विशेषतायें

हिन्दुओं में कोई पैगम्बर नहीं है

हिन्दुओं में कोई पैगम्बर नहीं है

दुनिया के दूसरे धर्मों में पैगम्बरों की भूमिकाएं रही हैं। इस्लाम धर्म में कई पैगम्बरों का वर्णन है। ईसाई धर्म में ईसा मसीह धर्म के प्रवर्तक थे। लेकिन हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमें किसी पैगम्बर की कोई भूमिका नहीं रही है। इसम...

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विद्यारम्भ संस्कार

विद्यारम्भ संस्कार

हिन्दू धर्म के अनुसार विद्यारंभ संस्कार बेहद आवश्यक माना गया है। विद्यारम्भ का अर्थ है कि बालक को शिक्षा के पारंभिक स्तर से परिचित कराना। पुराने समय में जब बच्चे शिक्षा के लिए गुरुकुल जाते थे तब इस संस्कार को अत्यधिक महत्त्व दि...

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मुण्डन संस्कार

मुण्डन संस्कार

मुंडन संस्कार के अनुसार, शिशु के सिर के बाल उतारे जाते हैं। इस संस्कार को बेहद पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि मनुष्य के जन्म के समय जो बाल सिर पर होते हैं वह अपवित्र होते हैं। उन्हें काटे बिना मनुष्य विकास नहीं कर सकता। इस ...

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हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से ऊपर

हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से ऊपर

हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग नरक से ऊपर उठकर मोक्ष की प्राप्ति करना है। अलग-अलग धर्मों में स्वर्ग नरक को लेकर अपनी- अपनी अलग धारणाएं हैं। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में लिखा गया है कि पुण्य करते रहने से स्वर्ग की प्राप्ति होगी जहां ह...

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ईश्वर एक नाम अनेक

ईश्वर एक नाम अनेक

सनातन धर्म में माना जाता है कि ईश्वर एक है लेकिन उसके नाम अनेक हैं। ऋग्वेद के अनुसार ईश्वर एक ही है लेकिन अपने कर्ताभाव के अनुसार वह अलग- अलग नामों से जाने जाते हैं जैसे कि- 


नाम अनेक <...

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हिन्दुत्व का लक्ष्य पुरुषार्थ है

हिन्दुत्व का लक्ष्य पुरुषार्थ है

हिन्दू धर्म में पुरुषार्थ से तात्पर्य मानव के लक्ष्य या उद्देश्य से है। पुरुषार्थ = पुरुष+अर्थ अर्थात मानव को क्या प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिये। प्रायः मनुष्य के लिये वेदों में चार पुरुषार्थों का नाम लिया गया है- धर्म, अ...

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हिन्दुत्व का वास हिन्दू के मन, संस्कार और परम्पराओं में

हिन्दुत्व का वास हिन्दू के मन, संस्कार और परम्पराओं में

हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हिन्दू धर्म संस्कारों और परंपराओं को सबसे ऊपर रखता है। हिन्दू धर्म में मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसे कई संस्कारों से गुजरना पड़ता है। सभी संस्कार हिन्दू धर्म की परंपरा का...

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सती का अर्थ पति के प्रति सत्यनिष्ठा है

सती का अर्थ पति के प्रति सत्यनिष्ठा है

दुनिया के हर धर्म में स्त्री को आदरणीय माना गया है। हिन्दू धर्म में स्त्रियों को भगवान के कई रूपों में देखा गया है। इन्हें पूजनीय और आदरणीय माना जाता है। यहां तक की पुराणों में आदि शक्ति दुर्गा जी को त्रिदेवों से ऊपर बताया गया ...

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प्राणि-सेवा ही परमात्मा की सेवा है

प्राणि-सेवा ही परमात्मा की सेवा है

दूसरों का उपकार करना ही पुण्य है,
दूसरों   को   सताना   ही   पाप  है 
 
उपरोक्त पंक्तियों ही हिन्दू धर्म में सेवा का मूल आधार है। हिन्दू धर्म में मानवता के विषय को बेहद महत्व...

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सबसे बड़ा मंत्र गायत्री मंत्र

सबसे बड़ा मंत्र गायत्री मंत्र

हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा मंत्र गायत्री मंत्र को कहा गया है। गायत्री मंत्र पूजा का सिर्फ एक साधन नहीं है बल्कि यह अपने आप में ही प्रभु की आराधना का माध्यम है। इस संसार में सूर्यदेव को एकमात्र दिखाई देने वाला देवता माना जाता है।...

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आत्मा अजर-अमर है

आत्मा अजर-अमर है


हिंदू धर्म में मृत्यु को सबसे बड़ा सत्य माना गया है। हिन्दू धर्म के अनुसार जिस जीव ने इस संसार में जन्म लिया है उसे मरना ही है लेकिन साथ ही हिंदू धर्म में आत्मा को अजर-अमर माना गया है। दरअसल इसके लिए हिंदू धर्म के उस दर्श...

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धार्मिक विशेषतायें

धार्मिक विशेषतायें

प्रत्येक धर्म की कुछ आस्थाएं और विशेषताएं होती है। यह प्रमुख तत्व धर्म विशेष को परिभाषित करने में निर्णायक कड़ी साबित होते हैं। विभिन्न धर्मों के महत्वपूर्ण तत्व जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

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कर्णवेध संस्कार

कर्णवेध संस्कार

कर्णवेध संस्कार सनातन (हिन्दू) धर्म संस्कारों में नवां संस्कार है। माना जाता है कि इस विधि से शिशु की शारीरिक व्याधि से रक्षा की जा सकती है। कर्ण वेधन से सुनने की शक्ति भी बढ़ती है और कानों में आभूषण धारण करने से हमारे सौन्दर्य...

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उपनयन (जनेऊ) संस्कार

उपनयन (जनेऊ) संस्कार

यज्ञोपवित यानि उपनयन संस्कार सबसे पवित्र संस्कार होता है। हिन्दू धर्म के अनुसार यह संस्कार एक समय मुख्य आवश्यकता मानी जाती थी। हालांकि आज के समय में इसका बेहद कम उपयोग होता है। उपनयन संस्कार के अनुसार मनुष्य जनेऊ धारण कर आयु, ब...

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नामकरण संस्कार

नामकरण संस्कार

नाम न सिर्फ हमारी पहचान बताता है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व, स्वभाव, बर्ताव और भविष्य पर भी प्रभाव डालता है। नाम के इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए हिन्दू धर्म में नामकरण संस्कार की व्यवस्था की गई है।

नामकरण संस्कार हिन...

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ईश्वर से डरें नहीं, प्रेम करें और प्रेरणा लें

ईश्वर से डरें नहीं, प्रेम करें और प्रेरणा लें

हिन्दू धर्म में कई देवी-देवताओं का वर्णन है। मान्यतानुसार हमें भगवान ने बनाया है और वही हमारा पालन करता है। हम सभी परमपिता ईश्वर की सन्तान हैं। भगवान कई प्रकार के होते हैं। भगवान शिव को रुद्र तो विष्णु जी को पालक माना जाता है।&...

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हिन्दुत्व एकत्व का दर्शन है

हिन्दुत्व एकत्व का दर्शन है

हिंदू धर्म केवल एक धर्म नहीं बल्कि जीने का तरीका है। हिन्दुत्व के कई सिद्धांत पूर्णत: व्यवहारिक यानि प्रैक्टिकल जीवन से जुड़े हैं। हिन्दुत्व के प्रमुख सिद्धांतों में से एक है एकत्व का दर्शन। हिन्दू धर्म के हर क्षेत्र में आपको एक...

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हिन्दू दृष्टि समतावादी एवं समन्वयवादी

हिन्दू दृष्टि समतावादी एवं समन्वयवादी

‘उदारचरितानाम् वसुधैव कुटुम्बकम्’ । 
 
उपरोक्त पंक्तियों का अर्थ है कि उदारचरित वाले मनुष्य के लिए विश्व की घर होता है। यह पंक्तियां हिन्दू सनातन धर्म के मुख्य दर्शन और सिद्धांत "...

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पर्यावरण की रक्षा को उच्च प्राथमिकता

पर्यावरण की रक्षा को उच्च प्राथमिकता

हिन्दू धर्म की प्रमुख विशेषताओं में पर्यावरण की रक्षा भी एक बेहद खास विषय है। प्राचीन वेद-पुराणों से लेकर आध्यात्मिक गुरुओं ने भी पर्यावरण की रक्षा पर बल दिया है। पर्यावरण के संरक्षण को आम जनता के लिए सुगम बनाने के लिए ही विभिन...

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हिन्दुओं के पर्व और त्योहार खुशियों से जुड़े हैं

हिन्दुओं के पर्व और त्योहार खुशियों से जुड़े हैं

हिन्दुओं के पर्व एवं त्योहार पर बिना पूर्ण जानकारी किये भी मुबारकबाद दिया जा सकता है क्योंकि हिन्दू मातम का त्योहार नहीं मनाते । राम और कृष्ण के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है किन्तु उनके देहावसान के दिन लोगों को याद तक न...

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स्त्री आदरणीय है

स्त्री आदरणीय है

हिन्दू धर्म में स्त्री को आदरणीय माना जाता है। वेदों और पुराणों में आदि शक्ति को एक नारी का ही रूप माना गया है। मान्यता है कि त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी अपनी शक्तियां इन्हीं देवी से पाते हैं। हिन्दू धर्म दर्शन में ...

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क्रिया की प्रतिक्रिया होती है

क्रिया की प्रतिक्रिया होती है

हिन्दू सनातन धर्म में मान्यता है कि जो जैसा बोता है वैसा ही काटता भी है और जो जैसा करता है वैसा भी भोगता है। हिन्दू धर्म इस बात पर जोर देता है कि जो जैसा करेगा वैसा ही भरेगा। कई कथाओं और प्रसंगों से यह बात जाहिर होती है। हिन्दू...

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