हिन्दू धर्म की धार्मिक पुस्तकें

बालकाण्ड

‘रामायण’ के प्रथम भाग को "बालकाण्ड" के नाम से जाना जाता है। इस बहग में लगभग दो हजार दो अस्सी श्लोक हैं। इस भाग का संक्षिप्त वर्णन देवर्षि नारद ने महर्षि वाल्मीकि को सुनाया था। बालकाण्ड के प्रथम सर्ग आदिकाव...

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अयोध्याकाण्ड

‘रामायण’ के दूसरे भाग को "अयोध्याकाण्ड" के नाम से जाना जाता है। इस भाग में राम के राज्याभिषेक का निर्णय तथा राजनीति के उपदेश, कैकेयी के वचन, दशरथ का चिंतन, राम को चौदह वर्ष का वनवास, पुत्र के वियोग में दशर...

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अरण्यकाण्ड

‘रामायण’ के तीसरे यानि अरण्यकाण्ड में पिचहत्तर सर्ग व दो हजार चार सौ चालीस श्लोकों की संख्या है। इस भाग में ही शूर्पणखा का मिलना व उसके नाक-कान काटना, खरदूषण व त्रिशिरा वध, सीता हरण आदि का वर्णन मिलता है। इस भाग को ...

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किष्किंधा काण्ड

‘रामायण’ के चौथे भाग को किष्किंधाकाण्ड के नाम से जाना जाता है। इस भाग में राम-हनुमान मिलन, वानर राज सुग्रीव से मित्रता, सीता को खोजने के लिए सुग्रीव की प्रतिज्ञा, बाली व सुग्रीव का युद्ध, बाली-वध, अंगद का युवराज पद,...

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सुंदर काण्ड

रामायण’ के पांचवें भाग को सुंदरकाण्ड के नाम से जाना जाता है। यह भाग मुख्य रूप से भगवान हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी की राम भक्ति, लंका दहन के साथ इस भाग में हनुमान जी से जुड़े अनेकों प्रसंग है। आज भी हनुमान जी की पूज...

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लंका काण्ड

‘रामायण’ के छठवें यानि लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) में लगभग पाँच हजार छः सौ बानवे श्लोकों की संख्या है। इस भाग में लंका पर चढ़ाई, समुद्र पर क्रोध, विभीषण का तिरस्कार, विभीषण का राम की शरण लेना आदि का विस्तारपूर्वक वर्णन क...

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उत्तरकाण्ड

रामायण का अंतिम भाग यानि उत्तरकाण्ड में एक सौ ग्यारह सर्ग तथा तीन हजार चार सौ बत्तीस श्लोकों की संख्या है। उत्तरकाण्ड में रावण के पितामह, रावण के पराक्रम की चर्चा, सीता का पूर्वजन्म, देवी वेदवती को रावण का श्राप, रावण-बालि का य...

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बाल काण्ड 1

 श्री रामजी का ऐश्वर्य और सती का खेद और सती का भ्रम

दोहा- राम बचन मृदु गूढ़ सुनि उपजा अति संकोचु।
सती सभीत महेस पहिं चलीं हृदयँ बड़ सोचु॥५३॥

मैं संकर कर कहा न माना। निज अग्यानु राम पर...

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बाल काण्ड 2

मनु-शतरूपा तप एवं वरदान

दोहा- श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक प्रफुल्लित गात।
बोले मनु करि दंडवत प्रेम न हृदयँ समात॥१४५॥

सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनु। बिधि हरि हर बंदित पद र...

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बाल काण्ड 3

प्रतापभानु की कथा

दोहा- नृप हरषेउ पहिचानि गुरु भ्रम बस रहा न चेत।
बरे तुरत सत सहस बर बिप्र कुटुंब समेत॥१७२॥

उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई॥
मायामय तेहिं कीन्ह रसो...

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बाल काण्ड 4

श्री राम-लक्ष्मण का जनकपुर घूमना

दोहा- रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस।
नख सिख सुंदर बंधु दोउ सोभा सकल सुदेस॥२१९॥

देखन नगरु भूपसुत आए। समाचार पुरबासिन्ह पाए॥ और पढ़ें »

बाल काण्ड 5

सीता स्वयंवर में लक्ष्मण जी का क्रोध

दोहा- प्रभुहि चितइ पुनि चितव महि राजत लोचन लोल।
खेलत मनसिज मीन जुग जनु बिधु मंडल डोल॥२५८॥

गिरा अलिनि मुख पंकज रोकी। प्रगट न लाज निसा अवलोकी॥
लोचन...

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अयोध्याकाण्ड 3

"ऊँ नम शिवाय" यह षडक्षर मंत्र सभी दुख दूर करने वाला मंत्र माना गया है। "ऊँ" भगवान शिव का एकाक्षर मंत्र हैं। "नम शिवाय" भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र है।

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बालकाण्ड 6

राम,लक्ष्मण, शत्रुध्न और भरत का विवाह, और विदाई

दोहा- रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज।
जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज॥।३०९॥

जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देह...

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बाल काण्ड 7

बारात का अयोध्या पहुंचना और अयोध्या में आनंद का महौल

देव पितर पूजे बिधि नीकी। पूजीं सकल बासना जी की॥
सबहिं बंदि मागहिं बरदाना। भाइन्ह सहित राम कल्याना॥
अंतरहित सुर आसिष देहीं। मुदित मातु अंच...

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अयोध्या काण्ड 1

श्री राम-कौसल्या संवाद

दोहा- यह बिचारि नहिं करउँ हठ झूठ सनेहु बढ़ाइ।
मानि मातु कर नात बलि सुरति बिसरि जनि जाइ॥५६॥

देव पितर सब तुन्हहि गोसाई। राखहुँ पलक नयन की नाई॥ और पढ़ें »

अयोध्या काण्ड 2

राम, सीता और लक्ष्मण का प्रयाग पहुँचना, भरद्वाज संवाद, यमुनातीर निवासियों का प्रेम

दोहा- तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ। ì
सखा अनुज सिया सहित बन गवनु कीन्ह रधुनाथ॥१०४॥

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अयोध्या काण्ड 3

राम-केवट संवाद, दशरथ का शोक, भरत का ननिहाल से लौटना

दोहा- कहि प्रनाम कछु कहन लिय सिय भइ सिथिल सनेह।
थकित बचन लोचन सजल पुलक पल्लवित देह॥१५२॥

तेहि अवसर रघुबर रूख पाई। केवट पारहि नाव चलाई॥ और पढ़ें »

अयोध्या काण्ड 4

भरत-निषाद का मिलन तथा संवाद, भरत और नगरवासियों का प्रेम

दोहा- प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि सिरु नाइ।
आगें किए निषाद गन दीन्हेउ कटकु चलाइ॥२०२॥

कियउ निषादनाथु अगुआईं। मातु पालकीं सकल च...

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अयोध्या काण्ड 5

गुरु वशिष्ठ जी के वचन

दोहा- गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे आयसु पाइ।
बिप्र महाजन सचिव सब जुरे सभासद आइ॥२५३॥

बोले मुनिबरु समय समाना। सुनहु सभासद भरत सुजाना॥
धरम धुरीन भानुकुल भानू। राजा...

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अयोध्या काण्ड 6

श्रीराम और भरत का संवाद

छंद- रघुराउ सिथिल सनेहँ साु समाज मुनि मिथिला धनी।
मन महुँ सराहत भरत भायप भगति की महिमा घनी॥
भरतहि प्रसंसत बिबुध बरषत सुमन मानस मलिन से।
तुलसी बिकल सब लोग सुनि स...

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सुंदर काण्ड 1

राम दूत का रावण को समझाना

दोहा- द्विबिद मयंद नील नल अंगद गद बिकटासि।
दधिमुख केहरि निसठ सठ जामवंत बलरासि॥५४॥

ए कपि सब सुग्रीव समाना। इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना॥
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लंका काण्ड 1

लक्ष्मण और मेघनाद का युद्ध, लक्ष्मणजी को शक्तिबाण लगना

दोहा- आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।
लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ॥५२॥

छतज नयन उर बाहु बिसाला। हिमग...

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उत्तरकाण्ड 1

भगवान शिव और पार्वती संवाद, गरुड़ मोह, रामकथा और राम महिमा सुनना

दोहा- तब कछु काल मराल तनु धरि तहँ कीन्ह निवास।
सादर सुनि रघुपति गुन पुनि आयउँ कैलास॥५७॥

गिरिजा कहेउँ...

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उत्तरकाण्ड 2

काकभुशुण्डि का अपने पिछले जन्म कथा और कलि महिमा के बारे में बताना

दोहा- सुनु ब्यालारि काल कलि मल अवगुन आगार।
गुनउँ बहुत कलिजुग कर बिनु प्रयास निस्तार॥१०२(क)॥
कृतजुग त्रेता ...

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