लंका काण्ड

‘रामायण’ के छठवें यानि लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) में लगभग पाँच हजार छः सौ बानवे श्लोकों की संख्या है। इस भाग में लंका पर चढ़ाई, समुद्र पर क्रोध, विभीषण का तिरस्कार, विभीषण का राम की शरण लेना आदि का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।

लंकाकाण्ड/युद्धकाण्ड (Lankaakand/yudhkand)

शत्रोर्जये समुत्साहे जनवादे विगर्हिते।
लंकाकाण्डं पठेत् किं वा श्रृणुयात् स सुखी भवेत्॥

राम-रावण के बीच हुए युद्ध की पूरी कहानी इस भाग में दी गई है। शूरवीर योद्धाओं के युद्ध से लेकर विभीषण के बारें में इस भाग में विस्तारपूर्वक बताया गया है। बृहद्धर्मपुराण के अनुसार लंकाकाण्ड अथवा युद्धकाण्ड का पाठ करने से शत्रु के जय, उत्साह तथा अपवाद के दोषों से मुक्ति मिलती है।

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