किष्किंधा काण्ड

‘रामायण’ के चौथे भाग को किष्किंधाकाण्ड के नाम से जाना जाता है। इस भाग में राम-हनुमान मिलन, वानर राज सुग्रीव से मित्रता, सीता को खोजने के लिए सुग्रीव की प्रतिज्ञा, बाली व सुग्रीव का युद्ध, बाली-वध, अंगद का युवराज पद, ऋतुओं का वर्णन, वानर सेना का संगठन का विस्तार पूर्वक वर्णन मिलता है। इसके अतिरिक्त हनुमान का लंका जाना, जाम्बवंत की हनुमान को प्रेरणा आदि का व्याख्या की गई है।

किष्किंधाकाण्ड के लाभ (Benefits of Kishkindhakand)

मित्रलाभे तथा नष्टद्रव्यस्य च गवेषणे।
श्रुत्वा पठित्वा कैष्किन्ध्यं काण्डं तत्तत्फलं लभेत्॥

बृहद्धर्मपुराण के अनुसार ‘रामायण’ के किष्किंधाकाण्ड का पाठ करने से मित्रलाभ और बिछड़े परिजनों से मिलन होता है। मित्रता और भक्त के भाव और गुणों को समझने के लिए इस भाग को अहम मान

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