अयोध्याकाण्ड

‘रामायण’ के दूसरे भाग को "अयोध्याकाण्ड" के नाम से जाना जाता है। इस भाग में राम के राज्याभिषेक का निर्णय तथा राजनीति के उपदेश, कैकेयी के वचन, दशरथ का चिंतन, राम को चौदह वर्ष का वनवास, पुत्र के वियोग में दशरथ की मृत्यु, भरत का चित्रकूट जाना, राम व भरत के संवाद, माता अनुसूया का सीता को धर्म उपदेश आदि प्रसंग का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया।

अयोध्याकाण्ड का महत्व (Benefits of Ayodhyakand)

पुत्रजन्म विवाहादौ गुरुदर्शन एवं च।
पठेच्च श्रृणुयाच्चेव द्वितीयं काण्डमुत्तमम्॥

बृहद्धर्मपुराण के अनुसार अयोध्याकाण्ड का पाठ करने से शैक्षिक व पारिवारिक जीवन सहज होता है। विवाह, पुत्रजन्म, एवं गुरुदर्शन के लिए इस काण्ड का पाठ करना चाहिए। यह कांड परिवार में आपसी-मेलजोल की भावना और समाज में रहने की कला को समझाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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