अरण्यकाण्ड

‘रामायण’ के तीसरे यानि अरण्यकाण्ड में पिचहत्तर सर्ग व दो हजार चार सौ चालीस श्लोकों की संख्या है। इस भाग में ही शूर्पणखा का मिलना व उसके नाक-कान काटना, खरदूषण व त्रिशिरा वध, सीता हरण आदि का वर्णन मिलता है। इस भाग को बेहद रोचक माना जाता है। राम-रावण युद्ध की पृष्टभूमि को समझने के लिए इस भाग को पढ़ना बेहद आवश्यक है।

अरण्यकाण्ड का सार (Benefits of Aranyakand)

वने राजकुले वह्निजलपीडायुतो नर:।
पठेदारण्यकं काण्डं श्रृणुयाद् वा स मंगली॥

बृहद्धर्मपुराण के अनुसार अरण्यकाण्ड का पाठ करने से वन, राजकुल, अग्नि एवं जलपीड़ा का नाश होता है तथा मंगल प्राप्त होता है। रामायण को समझने के लिए इस भाग को पढ़ना बेहद आवश्यक माना जाता है।

लोकप्रिय फोटो गैलरी